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मंगलवार, 14 जून 2011

उत्तर प्रदेश में पुलिस थानों में पीट-पीट कर मार डालने की प्रतियोगिता प्रारंभ

खीरी लखीमपुर जनपद में थाने के अन्दर एक युवती की हत्या का मामला थमा नहीं था कि बाराबंकी जनपद में घुंघटेर थाने में भिठोकर निवासी गया प्रसाद सूरमा को पूछताछ के नाम पर पुलिस वालों ने पीट-पीट कर मार डाला। उसकी हत्या हो जाने के बाद पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों इस हत्या के मामले पर लीपापोती शुरू कर दी। पुलिस अधिकारीयों ने कहना शुरू किया कि बीती रात 12 बजे गया प्रसाद को ह्रदयघात हो जाने के कारण उसकी मौत हो गयी। जनता ने थाने का घेराव शुरू कर दिया तो पुलिस वालों को पोस्टमार्टम करा कर हत्या का मुकदमा थाना अध्यक्ष हरी लाल करदम, दरोगा बी.एन वर्मा, सिपाही संदीप अवधेश तीन अन्य लोगों के ऊपर कायम करना पड़ा।
पुलिस अधिकारीयों की भूमिका हत्या जैसे जघन्य अपराध के साक्ष्यों को नष्ट करने की होती है। यही काम इस केस में भी प्रारंभ हो गया था। अपराधिक विधि के अनुसार सबूतों को नष्ट करने वाले व्यक्तियों को अंतर्गत धारा 401 आई.पी.सी के तहत अभियुक्त होते हैं। ज्ञातव्य है कि भिठोकर गाँव में पांच वर्षीय सविता की हत्या हो गयी थी जिसकी पूछताछ के नाम पर एस..जी, पुलिस विभाग के उच्चाधिकारी गाँव से कई व्यक्तियों को पकड़ लाये थे और थाने में उनकी पिटाई का कार्यक्रम चल रहा था। मृतक गया प्रसाद सूरमा पुलिस की पिटाई बर्दाश्त कर पाया और काल के गाल में समा गया। फिर उसके बाद पुलिस अधिकारीयों का बचाव का प्रबंधन शुरू हुआ। तरह-तरह के उपाय निकाले जाने लगे। हर छान अधिकारीयों ने अपने बयान बदले। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के पास जुगाड़ शुरू हुआ और हो सकता है कि मृतक गया प्रसाद सूरमा का पोस्टमार्टम पुन: कराना पड़े।
उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्तिथि बेहद ख़राब है उच्च अधिकारीयों के खिलाफ गंभीर से गंभीर अपराधिक मामलों में उनके खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं होती इसीलिए प्रदेश भर के थानों में पूछताछ के नाम पर तब तक पीता जाता है जबतक मोती रकम देना लोग स्वीकार कर लें अन्यथा मृत्यु ही उनको उस पिटाई से मुक्ति दिला पाती है। अधिकांश मामलों में कोई कार्यवाई संभव नहीं हो पाती है। जिससे पुलिस के हौसले इस तरह कामो को करने के लिये बुलंद रहते हैं।


-महंत बी.पी दास
लो क सं घ र्ष !

गुरुवार, 2 जून 2011

बृजलाल: तुम्हारी कानून व्यवस्था में मंत्री से भी घूस दिलाने के लिये कहा जाता है

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने के लिये पुलिस महानिदेशक पद पर वरिष्ठ आई.पी.एस अधिकारी बृजलाल तैनात हैं और प्रत्येक मामले में उनके अखबारी दावे प्रकाशित होते रहते हैं प्रदेश में इस समय कानून व्यवस्था की सबसे बदतर स्तिथि है पुलिस अभी तक पीड़ित व्यक्तियों से और मोटर वाहनों से वसूली के लिये प्रसिद्द थी अब वह समय गया है कि सिपाही मंत्री से कहता है कि खर्चा पानी दिला दीजिये
बाराबंकी जनपद में सफदरगंज थाने के औलिया लालपुर के निवासी खादरापुर के सदस्य क्षेत्र पंचायत सुनील कुमार के कुछ पेड़ आंधी तूफ़ान में गिर गए थे कीमती लकड़ियाँ वह कटवा रहे थे कि थाना सफदरगंज के सिपाही योगेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचा और सुनील को धमकाते हुए खर्चा पानी की मांग की इससे पहले यही सिपाही सुनील से दो कुंतल लकड़ी धमका कर ले जा चुका था पुलिस की इस कारगुजारी से अजीज होकर सुनील ने प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री डॉ संग्राम सिंह को मोबाइल मिलाया और घटना की जानकारी दी मंत्री ने सिपाही को मोबाइल देने के लिये कहा जिस पर सिपाही ने मोबाइल पर बात करते हुए मंत्री से कहा खर्चा पानी दिला दो और कोई बात नहीं होगी इस बात की शिकायत मंत्री ने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी से की जिस पर उक्त सिपाही को निलंबित कर दिया गया और घटना की जांच सी सादर को सौंपी गयी
प्रदेश में पुलिस विभाग ने जनता से धन वसूली के लिये विभिन्न मद बना रखे हैं और बगैर धन दिए कोई कार्य नहीं हो सकता है कानून का उपयोग उच्च पुलिस अधिकारियो के जानकारी में होते हुए भी धन वसूली के लिये ही किया जाता है कानून का उपयोग कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये नहीं है अपितु जनता से धन वसूली के लिये है सरकार जितना टैक्स जनता से लिखा पढ़ी में वसूलती है उससे कहीं कई गुना की धन वसूली पुलिस विभाग करता है और जब पुलिस विभाग की यह स्तिथि है तो प्रदेश में क्या हो रहा होगा

सुमन
लो क सं घ र्ष !
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