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मंगलवार, 19 जनवरी 2016

नागपुर के मुंह पर पट्टी बंधी


पठानकोट हमले से ठीक पहले आतंकियों द्वारा अगवा किए गए पंजाब पुलिस के एसपी सलविंदर की कहानी का सच क्या है, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) उनके पॉलिग्राफ टेस्ट के जरिए यह जानने की कोशिश कर रही है। कोर्ट की मंजूरी के बाद मंगलवार को सलविंदर को पॉलिग्राफिक टेस्ट किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक सलविंदर का एम्स में ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी करवाया जा सकता है। सलविंदर उस रात 'पेमेंट' लेने गए थे? जानकारों के मुताबिक, पॉलिग्राफ टेस्ट कराने के फैसले का मतलब ही यह है कि संबद्ध व्यक्ति पर शक ही नहीं, बल्कि अब वह बड़े शक के घेरे में आ चुका है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।
               अगर यह एस पी इस्लाम  धर्म का होता तो नागपुर और उसके चेले अग्निबाण चला रह होते  .   देश द्रोही बताने के लाखो प्रमाण पत्र छपे रह गए है नाम किसका लिख दिया जाय .हल्ला मचाने वोट नही बढना है इसलिए चुप्प है .मोदी की पाकिस्तान यात्रा के बाद अजहर मसूद की गिरफ़्तारी का हल्ला भी उनके चेलो ने मचाया लेकिन शनि की दशा होने के कारण कोई टोटका कम नही आ रहा है अब मिडिया ही कह रहा है कि 'पाकिस्‍तान में आजाद घूम रहा है जैश-ए-मोहम्‍मद प्रमुख मसूद अजहर, गिरफ्तारी के दावे झूठे '  वही मोदी साहब विकास   की पुडिया ले जाकर असम में खोल रहे है हैदराबाद की कोई याद  नही रखना चाहते है दलित ने ही तो आत्महत्या की है चित्पावन नही मरा है . वही अब भी कहा जा रहा है कि  पाकिस्तान से दोस्ती अमरीकी आका  के कहने से होगी या दोनों देशो की सरकारों की  ईमानदारी के प्रयासों से होगी लेकिन माला जपनी है जपा जा रहा है जापका एक अंश यह भी है -केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान इस हमले के गुनाहगारों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि शायद इस बार कुछ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद समूची दुनिया के लिए समस्या है। पाकिस्तान भी आतंकवाद का एक अड्डा है। इसलिए उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी है। 
            पट्टी तो खुलनी ही है  झूठ और अफवाहबाजी से देश नही चलता है गद्दारी तो कर सकते  हो देश नही चला सकते हो  धर्म  के आधार पर विभाजन करवाया -गाँधी को गोली मारी -दंगे करवाए अब क्या करोगे ?
-रणधीर  सिंह सुमन

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

नए अंग्रेजों द्वारा टीपू सुलतान की फिर हत्या

टीपू सुल्तान मैसूर का शासक था. उसने ईस्ट इंडिया कंपनी को कई बार पराजित किया था और टीपू सुलतान के खिलाफ निज़ाम हैदराबाद व मराठा अंग्रेजों के साथ शामिल रहते थे. उसके बावजूद टीपू सुलतान हरा पाने में अंग्रेज असमर्थ थे और मजबूर होकर उन्होंने मंगलौर संधि कर ली थी. सबसे बड़ी बात यह है तत्कालीन अन्य शासक टीपू सुलतान की मदद अंग्रेजों के खिलाफ नहीं कर रहे थे. आज उसी टीपू सुलतान की चरित्र हत्या सम्बन्धी बहुत सारी कहानियां जो कई वर्षों से नागपुर की इतिहास की प्रयोगशाला में तैयार की जा रही थी. उनको सोशल मीडिया में काफी पहले से प्रकाशित किया जा रहा था. उसको कट्टरवादी मुसलमान तथा हिन्दुवों का विरोधी साबित करने के लिए नागपुरी कार्यकर्त्ता तरह-तरह की अफवाहबाजी फैला कर झूठ को सत्य बनाने का काम कर रहे हैं. टीपू सुलतान जब निजाम की गद्दारी के कारण 1799 में श्रीरंगपट्टनम में शहीद हुआ तो उसके हाथ की उँगलियों में पहनी हुई अंगूठी जिसमें राम लिखा हुआ था, एक अंग्रेज जनरल ने निकाल लिया था जिसकी नीलामी अभी कुछ वर्ष पूर्व इंग्लैंड में हुई है लेकिन संघी दुष्प्रचारक आज टीपू सुलतान को हिन्दू विरोधी साबित करने के लिए तरह-तरह की कहानियां फैला रहे हैं. टीपू सुल्तान को भारत में ब्रिटिश शासन से लोहा लेने के लिए जाना जाता है.
 टीपू की शहादत के बाद अंग्रेज़ श्रीरंगपट्टनम से दो रॉकेट ब्रिटेन के 'वूलविच संग्रहालय' की आर्टिलरी गैलरी में प्रदर्शनी के लिए ले गए। सुल्तान ने 1782 में अपने पिता के निधन के बाद मैसूर की कमान संभाली थी और अपने अल्प समय के शासनकाल में ही विकास कार्यों की झड़ी लगा दी थी। उसने जल भंडारण के लिए कावेरी नदी के उस स्थान पर एक बाँध की नींव रखी, जहाँ आज 'कृष्णराज सागर बाँध' मौजूद है। टीपू ने अपने पिता द्वारा शुरू की गई 'लाल बाग़ परियोजना' को सफलतापूर्वक पूरा किया। टीपू निःसन्देह एक कुशल प्रशासक एवं योग्य सेनापति था। उसने 'आधुनिक कैलेण्डर' की शुरुआत की और सिक्का ढुलाई तथा नाप-तोप की नई प्रणाली का प्रयोग किया। उसने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में 'स्वतन्त्रता का वृक्ष' लगवाया.
समय रहते हुए यदि जागरूक लोग नहीं चेते तो निश्चित रूप से इस देश के इतिहास को संघी प्रयोगशाला हिन्दू और मुसलमान के आधार पर विभक्त कर देगी और मुस्लिम शासकों द्वारा किये गए अच्छे कार्यों को वह हिन्दू विरोध में बदल देगी. मुख्य कारण यह है कि संघी प्रयोगशाला के लोगों का चेहरा भारतीय इतिहास में ईस्ट इंडिया कंपनी या अंग्रेजों की चापलूसी करने का ही रहा है. इनके पास कोई नायक नहीं है इसलिए भारतीय इतिहास के महानायकों को यह लोग खलनायक की भूमिका में बदल देना चाहते हैं. इसके लिए इतिहास इन्हें माफ़ नहीं करेगा. कर्नाटक सरकार जब टीपू सुलतान का जन्मदिन मना रही है तो तथाकथित हिन्दुवत्व वादी इतिहास के इस महानायक की चरित्र हत्या कर रहे हैं. इन मुखौटाधारियों की पोल खुल चुकी है इसीलिए दिल्ली, बिहार में बुरी तरह पराजित होने के बावजूद कोई सबक नहीं ले रहे हैं.

सुमन 

शनिवार, 15 अगस्त 2015

गणवेश धारियों को पुंछ सीमा पर जाना चाहिए

आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने विदेश नीति के सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा. एक तरफ पाकिस्तान से वार्ता शुरू हो रही है वहीँ, आज के दिन पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के चार सेक्टरों में उसके सुरक्षा बलों की ओर से भारतीय चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर की गई भीषण गोलीबारी और मोर्टर बम दागने से एक सरपंच सहित तीन नागरिकों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। 
   लोकसभा चुनाव के समय गणवेश धारी नेतागण कुर्ता-धोती पहनकर एक के बदले चार मारने की लम्बी-चौड़ी शेख चिल्ली स्टाइल में बातें किया करते थे और आज जब वह लोग सत्ता में हैं तो सारी बंदूकें व हेकड़ी भूल गए हैं और खिसियानी बिल्ली की तरह उनका राष्ट्रवाद और देश भक्ति गायब हो चुकी है और वह कुछ कह पाने की स्तिथि में नहीं रह गए हैं. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शनिवार की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुभकामना संदेश भेजा। दोनों देशों के बीच 23 अगस्त को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत होने जा रही है। अगर यूपीए की सरकार होती तो सारा गणवेश धारी नेता जोर-जोर से चिल्ला रहा होता कि पाकिस्तान से बात नहीं होगी पहले बदला लिया जायेगा.
                                        जुलाई में 19 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए। सरकार ने लोकसभा में बताया था कि 26 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान ने 192 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है।नागपुर मुख्यालय 1925 से गण वेश धारियों को लाठी सिखाना, तलवार सिखाना जैसे प्रशिक्षण देता रहा है किन्तु आजादी की लड़ाई में उनकी तलवारें जंग खा रही थी और एक भी विदेशी शासक के ऊपर तलवार नहीं चल पायी उनके हाथ और दिल अंग्रेजों का नाम सुनकर काँप उठते थे. देश के अन्दर वह वर्ग विशेष की राष्ट्र भक्ति व देश भक्ति का प्रमाण पत्र मांगते हुए वैमनस्यता फैला कर बहुसंख्यक आबादी को उग्र बना कर वोटों की मंडी में अपना बहुमत प्राप्त करते हैं. आज जब जरूरत है कि वह गण वेश धारी अपनी राष्ट्र भक्ति व देश भक्ति का प्रदर्शन पुंछ सीमा पर करें. वोटों के लिए आतंकवाद की राजनीती के तहत इस बार 14 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ) आई बी की सूचनाओं पर आतंकवादी मुठभेड़ में मारे नहीं गए और न ही रेलवे स्टेशन, एरोड्रम जैसे स्थानों को उड़ाने की धमकी या सूचना नहीं प्रसारित की गयी क्यूंकि इस बार चुनाव नहीं होना है और नागपुर मुख्यालय को इस तरह की अफवाहों से कोई फायदा नहीं होना है इसलिए सब कुछ शांत रहा. 

सुमन 
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