भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 24 अक्टूबर 2018

प्रधानमंत्री मोदी खुद राफेल घोटाले में संलिप्त है-रणधीर सिंह सुमन

  1.   बाराबंकी। भ्रष्टाचार के कारण आज सी0बी0आई0 मुख्यालय को सील करना पड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी स्ंवय राफेल घोटाले में संलिप्त है। 
  2.                           उक्त आरोप लगाते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने राष्ट्र व्यापी पार्टी द्वारा द्वारा आयोजित प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये। श्री सिंह ने आगे कहा कि देश मे भ्रष्टाचार अपनी सीमायें तोड़ रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कार्यवाही सम्भव ही नही रह गई है।
  3.                             पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई बड़ी मुश्किल है। क्योकि भ्रष्टाचारियो ने धर्म का आवरण ओढ़ रखा है। इसलिये आवश्यक है कि धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखा जाये। पार्टी के जिला सहसचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि राफेल घोटाले में जैसे उच्चतम न्यायालय ने पूछताछ शुरु की। कि विदेश राज्यमंत्री सीतारमण भ्रष्टाचार को दबाने के लिये पेरिस पहुंच गई। पाटी सह-सचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि नोटबन्दी घोटाला, राफेल घोटाले ने देश की अर्थ व्यवस्था को नष्ट कर दिया है। 
  4.                         
    किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार िंसह ने कहा कि राफेल घोटाले की लडाई आगे तक लड़ी जायेगी। प्रदर्शन में प्रवीण कुमार, मुनेश्वर, गिरीश चन्द्र, वीरेन्द्र कुमार, रामनाथ, गौरी रस्तोगी, राजेन्द्र सिंह राणा, नीरज वर्मा, दल सिंगार, महेन्द्र यादव, रामशंकर शर्मा, बलीराम, रामनरेश, सुरेश, सर्विन्द्र कुमार, रामविलस, कल्लूराम आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सोमवार, 20 अगस्त 2018

मुट्ठी भर कारपोरेट घराने और पूंजीपति अपने धन के बल पर सत्ताधारी दल पर नियंत्रण करेंगें

लखनऊ. मोदी सरकार ने संसद में बिना चर्चा कराये अपने संख्या बल पर संविधान में संशोधन कर पूँजीपतियों से चुनाव बाण्ड्स के जरिये असीमित चंदा लेने का रास्ता खोल दिया है। इससे चुनावों में पहले से चली आरही धन की भूमिका खतरनाक हद तक बढ़ जायेगी। मुट्ठी भर कारपोरेट घराने और पूंजीपति अपने धन के बल पर सत्ताधारी दल और उन दलों को जो उनके हितों को पूरा कराने को जनता के हितों को कुचलते हैं, पर अपना नियंत्रण और मजबूत करेंगे।
                         यह विचार व्यक्त करते हुए  भाकपा ( मा॰ ) की पोलिट ब्यूरो के सदस्य और पूर्व सांसद नीलोत्पल बसु ने कहा कि  इस नियम को बदलवाने के लिये वामपंथी दलों और अन्य दलों को जनता के बीच जाकर अभियान चलाना होगा और इस कानून को पलटवाना होगा नहीं तो 2019 के चुनाव की तस्वीर बहुत ही भयावह होगी। समानुपातिक चुनाव प्रणाली की वकालत करते हुये उन्होने कहाकि हमें इसी पर नहीं रुक जाना चाहिये अपितु ऐसी चुनाव प्रणाली के लिये काम करना चाहिये जो सर्वाधिक लोकतान्त्रिक हो। उन्होने उत्तर प्रदेश के वामदलों की प्रशंसा की कि उन्होने एक अति सामयिक मुद्दे को उठाने की पहलकदमी की है।
                              कन्वेन्शन के प्रारंभ में चर्चा हेतु आधार पत्र प्रस्तुत करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि हमारे देश की मौजूदा चुनाव प्रणाली उस ब्रिटिश उपनिवेशवाद की देन है जो ब्रिटेन में एक उदार लोकतन्त्र और अपने औपनिवेशिक देशों में कठोरतम लोकतन्त्र चलाना चाहता था। इस प्रणाली में अल्पमत बहुमत पर शासन चलाता है। गत लोकसभा चुनाव में मात्र 31 प्रतिशत मत लेकर भाजपा 282 सीटें हथिया लेगयी जबकि उसके विपक्ष में पड़े 69 प्रतिशत वोटो का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। आज यह प्रणाली धनबली बाहुबली, जातिवादी और सांप्रदायिक तत्वों को सत्ता हथियाने का साधन बन गयी है। समाज के वंचित तबके सत्ता में भागीदारी से वंचित होते जारहे हैं।
उन्होने कहाकि समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली में पार्टियों को प्राप्त मतों के समकक्ष प्रतिनिधित्व मिलता है। महिलाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और अन्य तबके भी सत्ता में भागीदार बनते हैं। पार्टियों की नीतियों पर वोट मिलता है और पार्टियों में आंतरिक लोकतन्त्र स्थापित करना पड़ता है। इस प्रणाली के जरिये गरीबों का शासन स्थापित किया जासकता है और समतमूलक समाज की स्थापना के काम को आगे बढ़ाया जासकता है। आज दुनियाँ के 92 देश इस प्रणाली को अपना चुके हैं। हाल ही में नेपाल में भी अर्ध समानुपातिक प्रणाली से चुनाव हुये और धर्मान्ध ताकतों को मुह की खानी पड़ी। डा॰ गिरीश ने कहाकि यदि यह प्रणाली लागू होजायेगी तो भाजपा कभी भी सत्ता का मुह नहीं देख पायेगी। उन्होने जनता के दूसरे सवालों के साथ जोड़ कर इस सवाल पर आंदोलन खड़ा करने पर ज़ोर दिया।
भाकपा- माले के पोलिट ब्यूरो के सदस्य का॰ रामजी राय ने कहाकि यह लड़ाई उस उत्तर प्रदेश से शुरू हुयी है जिसने 1857 में अँग्रेजी हुकूमत को ललकारा था। वामपंथ को चाहिये कि वह जनता के ज्वलंत मुद्दों पर चल रहे आंदोलनों को और तेज करे।
कन्वेन्शन को आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के नेता उदय भान सिंह, सीपीएम के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव, भाकपा के राज्य सह सचिव अरविंदराज स्वरूप, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय सचिव शिव बरन सिंह, पूर्व विधायक, राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता अरुण यादव, अपना दल ( क्रष्णा पटेल ) के अध्यक्ष आर॰ बी॰ सिंह पटेल तथा लोकतान्त्रिक जनता दल के अध्यक्ष जुबेर अहमद ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता इम्तियाज़ अहमद पूर्व विधायक, दीनानाथ यादव पूर्व विधायक, सुधाकर यादव तथा हरीशंकर गुप्ता ने की।
कन्वेन्शन में पारित प्रस्ताव में मांग की गयी है कि निर्वाचन आयोग चुनाव सुधार पर विभिन्न आयोगों, कमेटियों और न्यायिक फैसलों के आधार पर एकमुश्त ड्राफ्ट तैयार करे जिसमें समानुपातिक चुनाव प्रणाली की सिफ़ारिश भी शामिल हो। इस पर चर्चा के लिये सभी राजनेतिक दलों की बैठक बुलाई जाये।
ईवीएम के सवाल पर कन्वेन्शन की राय है कि सारा मतदान वीवीपेट युक्त मशीनों से हो। इन मशीनों की विश्वसनीयता की गारंटी करना निर्वाचन आयोग और सरकार की ज़िम्मेदारी है।
साथ ही पूँजीपतियों द्वारा राजनैतिक दलों को चंदा देने पर रोक लगाने, और यह चंदा चुनाव आयोग को दिये जाने, चुनाव प्रचार के लिये स्टेट फंडिंग किये जाने, चुनावी विज्ञापन और धन के बल पर होने वाले मीडिया मैनेजमेंट को प्रतिबंधित किये जाने, प्रत्याशी के चुनाव खर्च में दल का खर्च भी जोड़े जाने, अपराधियों के चुनाव लड़ने से रोकने की कारगर प्रणाली तैयार करने तथा चुने प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार जनता को दिये जाने की मांग भी की गयी है। 

सम्मेलन का आयोजन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) भाकपा- माले और फारबर्ड ब्लाक की राज्य कमेटियों ने संयुक्त रूप से किया था। कई धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक दलों के नेताओं ने सम्मेलन में पहुँच कर वामपंथी दलों की इस पहल के साथ एकजुटता का इजहार किया। इससे इस कन्वेन्शन का संदेश और व्यापक हुआ है। 
  कन्वेन्शन ने सभी लोकतान्त्रिक दलों, शख़्सियतों, बुद्धिजीवियों, दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, आदिवासियों और इन सभी के शुभचिंतकों से अपील की है कि वे समानुपातिक चुनाव प्रणाली और चुनाव सुधार लागू कराने की मुहिम में वामपंथी दलों का साथ दें।

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

कन्हैया कुमार जिन्दाबाद


बाराबंकी। राजनाथ सिंह मुर्दाबाद, देश भक्तों को देशद्रोही बताकर गिरफ्तारी बन्द करो, कन्हैया कुमार जिन्दाबाद, फर्जी मुकदमें वापस लो जैसे नारों के बीच जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के मुख्य षड्यंत्रकर्ता गृहमंत्री का पुतला जिलाधिकारी कार्यालय के सामने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने फूंका।
    पुतला दहन से पूर्व पार्टी के सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि आजादी की लड़ाई  में अंग्रेजों की मुखबरी करने वाले लोग आज जब सत्ता में है तो उनको हर नौजवान देशद्रोही ही नजर आ रहा है। इनके कार्यकर्ताओं ने गांधी की हत्या की थी और गांधी की हत्या को सही बताकर गोडसे को महिमामण्डित करते हैं। पार्टी के सहसचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि इनका पहले से तय किया हुआ एजेण्डा है यह मुस्लिम नौजवानों को फंसाकर देशद्रोही साबित करने का काम करते हैं। उमर खालिद को पहले यह लोग कश्मीरी बता रहे थे और फिर पाकिस्तान यात्रा करने की बात कर रहे थे और यह दोनों बाते झूठी साबित हुई। इससे यह साबित होता है कि यह लोग षड्यंत्र कर बेगुनाह छात्रों को देशद्रोह जैसे गम्भीर अपराध में फंसाकर उनका कैरियर समाप्त कर देना चाहते हैं।
   भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता डा0 उमेश चन्द्र वर्मा ने कहा कि कन्हैया कुमार के मामले में पार्टी चुप नहीं बैठेगी और उनके रिहाई तक आन्दोलन चलता रहेगा।
    पुतला दहन कार्यक्रम में किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, महामंत्री सत्येन्द्र कुमार, मुनेश्वर बख्श, नीरज वर्मा, विजय प्रताप सिंह, पुष्पेन्द्र कुमार, निर्मल वर्मा, गनेश सिंह, कर्मवीर सिंह, मो0 कदीर, अंकित यादव, राममिलन वर्मा, सुरेश यादव, गिरीश चन्द्र, वीरेन्द्र शुक्ला, रामनरेश, आनन्द सिंह, बलराम सिंह, प्रमोद कुमार वर्मा आदि प्रमुख लोग थे।




सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

सरकारें उद्योगपतियों के एजेंट

बाराबंकी। किसानों की भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव के विरोध में किसान सभा के नेतृत्व में जेल भरो नारे के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस गांधी भवन से चलकर लखनऊ रोड होते हुए तहसील, जिलाधिकारी कार्यालय, अतिरिक्त जिलाधिकारी कार्यालय होते हुए डी0आर0डी0ए0 होकर सभा में परिवर्तित हो गया। प्रशासन ने कोई गिरफ्तारी नहीं की।
    सभा को सम्बोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड बृजमोहन वर्मा ने कहा कि किसान जल जंगल भूमि की लड़ाई को आखिरी सांस तक लड़ेगा और किसी भी कीमत पर अपनी भूमि का अधिग्रहण नहीं होने देगा। वहीं किसान नेता रशीद अहमद वारसी ने कहा कि यह सरकार किसानों की व दश्तकारों की दुश्मन है। सरकार ने दश्तकारों की रोजी रोटी छीन ली है और अब वह किसानों की रोजी रोटी छीनने की कोशिश कर रही है।
    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सह सचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि आन्दोलन यहीं नही समाप्त होता है, दीपावली तक किसानों को प्रशिक्षित किया जायेगा। किसान आन्दोलन तब तक जारी रहेगा जब तक भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव प्रशासन वापस नहीं ले लेता है। पार्टी के राज्य परिषद सदस्य डा0 उमेश चन्द्र वर्मा ने कहा कि ट पूंजीवादी व्यवस्था में सरकारें उद्योगपतियों के एजेंट के रूप में कार्य कर रही हैं। जुलूस का नेतृत्व किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, अमर सिंह प्रधान, जियालाल वर्मा कर रहे थे। जुलूस में पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, राम नरेश वर्मा, राजेश सिंह, विपतराम, दल सिंगार, गिरीश, नीरज वर्मा, राजेन्द्र एडवोकेट, रमाशंकर शर्मा, उमाकान्त, विष्णु त्रिपाठी, मो0 शाहिद, वीरेन्द्र वर्मा, श्रवण कुमार आदि प्रमुख लोग थे।
    जुलूस में किसान लखनऊ विकास प्राधिकरण मुर्दाबाद, जिला प्रशासन मुर्दाबाद, ये दीवानें कहां चले, जेल चले भाई जेल चले आदि नारें लग रहे थे।



नीरज वर्मा
मंत्री
अखिल भारतीय किसान सभा
बाराबंकी 

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

हड़ताल:कान काट दिया

               श्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एक पंचायत कर्मचारी का कान काट दिया । खबरों के मुताबिक यह कर्मचारी ट्रेड यूनियनों के भारत बंद की वजह से काम पर नहीं आया था, जिससे तृणमूल के कार्यकर्ता नाराज थे। गौरतलब है कि आज 11 ट्रेड यूनियनों के भारत बंद का दूसरा दिन है।
   देशभर के लगभग 10 करोड़ मजदूर जिसमें मुख्यतः बैंक, बीमा, जनरल इंश्योरेंस, परिवहन, कारखाना मजदूर सहित राज्य कर्मचारियों की हड़ताल पर न्यायिक आदेश है कि वह बंद या हड़ताल  नहीं कर सकते हैं जबकि भारतीय श्रम कानूनों के तहत उनको अपनी मांगों के सम्बंध में हड़ताल करने का अधिकार है। कुछ लोगों का तर्क यह होता है कि हड़ताल से काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। जिन समुदायों को हड़ताल से असुविधा होती है उनको सरकार पर दबाव डालना चाहिए कि वह श्रमिक अशांति होने के पूर्व बातचीत के आधार पर हल करें। असुविधा महसूस करने वाला तबका इजारेदार बहुराष्ट्रीय कम्पनियों या उद्योगपतियों को जब लाखों लाख करोड़ रूपये का फायदा सरकार देती है तब वह चुप रहते है और जब मेहनतकश तबका अपनी भूख व प्यास तथा बुनियादी जरूरतों की मांग को पूरा करने के लिए धन की मांग करता है तब देश का मलाई खाने वाला तबका असहज महसूस करता है। जरूरत इस बात की है कि देश के मेहनतकश आवाम की बुनियादी जरूरतें पूरा करने वाला वेतन होना चाहिए न कि प्रबंध तंत्र के मालिकों को फायदा पहुँचाने वाली नीतिया होनी चाहिए।
पटना में आज विधानसभा घेराव की कोशिश कर रहे भाकपा, एआईएसफ और आशा की महिला कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बर्बर तरीके से पीटा...भाकपा राज्य सचिव राजेद्र प्रसाद सिंह और कॉमरेड विधायक अवधेश राय (अवधेश कुमार बछवाड़ा विधायक) की बेरहमी से पिटाई की गई, बुरी तरीके से 15-20 लाठियां मारी, कपड़े फटे, बेहोशी की हालत में घसीट कर ले जाया गया...एआईएसएफ के हदीस, धीरज का पुलिस ने मार सिर फोड़ा, महिलाओं पर भी बर्बरता से लाठियां मारी गईं, कई लोग घायल हैं...
नीतीश कुमार की तानाशाही मुर्दाबाद...दमन-शोषण के खिलाफ खड़ी जनता को लाल सलाम...
बंद के दूसरे दिन भी भाकपा, भाकपा माले समेत तमाम मजदूर-कर्मचारी यूनियन और संगठन सड़क पर उतरे...
 
दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में  ओखला में सैकड़ों लोगों की भीड़ आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए जा रही थी। इस भीड़ में से कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

बिहार में आरा और जहानाबाद में हड़ताल समर्थकों द्वारा ट्रेनों को रोके जाने की खबर है।
 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज से शुरू हुई मेहनतकशों की दो दिवसीय आम हड़ताल को बेहद सफल बताते हुए इसके लिए मजदूरों एवं कर्मचारियों के तमाम संगठनों को बधाई दी है। भाकपा ने
हड़ताल का समर्थन करने के लिए आम जनता को भी धन्यवाद दिया है।यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भी यह हड़ताल बेहद सफल है। जिलों-जिलों में हड़ताली कर्मचारी एवं मजदूरों के समर्थन में भाकपा कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतरे।
                     राजधानी लखनऊ में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश, वरिष्ठ नेता अशोक मिश्र, राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप तिवारी, राज्य कौंसिल सदस्य परमानन्द द्विवेदी, जिला सचिव मो. खालिक, विजय राजबली माथुर एवं महेन्द्र रावत समेत तमाम नेतागण मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए।
नोएडा में हुई तोड़-फोड़ एवं आगजनी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि राष्ट्र स्तर पर मजदूर वर्ग की शान्तिपूर्ण एवं व्यापक कार्यवाही को यह बदनाम करने की साजिश है। मजदूर वर्ग को इस हड़ताल का उद्देश्य, लक्ष्य एवं मर्यादायें भलीभांति मालूम हैं और वह ऐसी कार्यवाही नहीं कर सकता। अतएव घटना की उच्चस्तरीय जांच कराये जाने की जरूरत है।



चन्दन वर्मा
बाराबंकी

शनिवार, 21 मई 2011

रिश्वत को वैध बनाने की बेहूदगी को रोको

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उपमहासचिव एवं पूर्व संसद सदस्य एस0 सुधाकर रेड्डी ने केंद्रीय वित मंत्रालय के पोर्टल पर ”एक किस्म की रिश्वतों के मामले में . देने के काम को वैध क्यों न मान लिया जाये“ शीर्षक पेपर के होने के संबंध में केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को एक पत्र लिखकर आपत्ति व्यक्त की है। इस पेपर के लेखक वित्तमंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु हैं। उन्होंने लिखा है:




21 अप्रैल 2011 के ”हिंदु“ दैनिक में पी0 साईनाथ द्वारा लिखे एक लेख ”रिश्वतः एक छोटा पर रेडिकल विचार“ पढ़कर आश्चर्यचकित हो गया हूँ। साईनाथ ने अपने इस लेख में वित्तमंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु द्वारा लिखित पेपर- ”व्हाई, फॉर ए क्लास ऑफ ब्राइब्स, दि एक्ट ऑफ गिविंग ब्राइब शुड बी ट्रीटिड एज लीगल“ (एक किस्म की रिश्वतों के मामले में रिश्वत देने के काम को वैध क्यों न मान लिया जाये) को विस्तार से उद्घृत किया है। बसु के इस पेपर को वित्तमंत्रालय के पोर्टल पर भी डाल दिया गया है।



एक संविधान विरोधी और जन-विरोधी विचार और वह भी एक ऐसे सरकारी अधिकारी द्वारा जो राष्ट्र और भारत सरकार की अपनी तमाम सेवाओं में भारत के संविधान की शपथ लेता है, प्रचार के लिए भारत सरकार के पोर्टल का इस्तेमाल क्योंकर किया जा सकता है। यदि यह उनका निजी सुझाव है तो इसके लिए उन्हें अपने निजी वेबसाईट पर, सरकार से इतर अन्य किसी साईट का इस्तेमाल करना चाहिये था। मैं पक्के तौर पर विश्वास करता हूॅ कि प्रणव दा और पूर्व वित्तमंत्री एवं वर्तमान प्रधानमंत्री इस तरह के भड़काने वाले, राष्ट्रविरोधी और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन देने वाले विचारों का समर्थन नहीं करेंगे।

मुझे पक्का विश्वास है कि आप भ्रष्टाचार को वैध बनाने के बसु के विचारों से सहमत नहीं होंगे। बहरहाल, कौशिक बसु के लेख ने वित्तमंत्रालय के पोर्टल को काफी नुकसान पहुंचा दिया है। मेरा आपसे अनुरोध है कि इन विचारों को पूरी तरह से खारिज कर दें और कौशिक बसु के पेपर को सरकारी पोर्टल से तत्काल हटा दिया जाये। उपरोक्त तथ्यों के प्रकाश में, मैं आपसे अनुरोध करता हूॅ कि आप अपने आपको इसकी अंतवस्तु से अलग करें और सरकारी पोर्टल के इस तरह के दुरूपयोग के पीछे के असली इरादे की विस्तृत जांच करें।



आपको इस तरह की बातों की भर्त्सना करनी चाहिये क्योंकि ऐसी बातें लोकतांत्रिक व्यवस्था को बरबाद करने में ही मदद कर सकती है। इस तरह के असंवैधानिक कामों को लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिये। मुझे पक्का विश्वास है कि आप हमारी चिंता से सहमत होंगे और कन्फयूजन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठायेंगे।
Share |