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रविवार, 10 जनवरी 2016

पूरी दुनिया को लाल कर देंगी

रणधीर सिंह सुमन सम्बोधित करते हुए
 ए0बी0 वर्धन को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी  जब मुक्तिकामी शक्तियाँ पूरी दुनिया को लाल कर देंगी और मजदूर किसान का शोषण बन्द होगा।
                                                                 यह विचार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव ए0बी0 वर्धन को श्रद्धांजलि देते हुए जिला सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि ए0बी0 वर्धन के निधन से साम्प्रदायिकता के खिलाफ संघर्षशील जनता का एक मजबूत स्तम्भ ढह गया है।
                                      शोक सभा को सम्बोधित करते हुए पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि कामरेड वर्धन छात्र जीवन से ही वाम विचारों के नेतृत्व में जिन्दगी भर संघर्ष और अपना जीवन मजदूर किसान राज्य को लाने में लगा दिया। जवाहर लाल नेहरू डिग्री कालेज के प्रवक्ता डा0 राजेश मल्ल ने कहा कि यह सदी लाल सदी के रूप में लाने की आवश्यकता है तभी जनता का कल्याण हो सकता है।
                                                          पार्टी के जिला सहसचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि कामरेड वर्धन एक समाजवादी दुनिया बनाना चाहते थे हम उनके सपने को साकार करने के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
                                                शोक सभा को पत्रकार तारिक खान, प्रभात त्रिपाठी, नीरज वर्मा, डा0 उमेश वर्मा, मो0 कदीर, सत्येन्द्र कुमार, विनय कुमार सिंह, विपतराम, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता वरीम राईन ने भी सम्बोधित किया।
                                          शोक सभा में आनन्द सिंह, दलसिंगार, गिरीश चन्द्र, रामनरेश, पुष्पेन्द्र सिंह, राजेश कुमार, वीरेन्द्र कुमार, आशीष सिंह, अवधेश, हनुमान प्रसाद आदि प्रमुख लोग थे।


-नीरज वर्मा ,
एडवोकेट

सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

सरकारें उद्योगपतियों के एजेंट

बाराबंकी। किसानों की भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव के विरोध में किसान सभा के नेतृत्व में जेल भरो नारे के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस गांधी भवन से चलकर लखनऊ रोड होते हुए तहसील, जिलाधिकारी कार्यालय, अतिरिक्त जिलाधिकारी कार्यालय होते हुए डी0आर0डी0ए0 होकर सभा में परिवर्तित हो गया। प्रशासन ने कोई गिरफ्तारी नहीं की।
    सभा को सम्बोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड बृजमोहन वर्मा ने कहा कि किसान जल जंगल भूमि की लड़ाई को आखिरी सांस तक लड़ेगा और किसी भी कीमत पर अपनी भूमि का अधिग्रहण नहीं होने देगा। वहीं किसान नेता रशीद अहमद वारसी ने कहा कि यह सरकार किसानों की व दश्तकारों की दुश्मन है। सरकार ने दश्तकारों की रोजी रोटी छीन ली है और अब वह किसानों की रोजी रोटी छीनने की कोशिश कर रही है।
    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सह सचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि आन्दोलन यहीं नही समाप्त होता है, दीपावली तक किसानों को प्रशिक्षित किया जायेगा। किसान आन्दोलन तब तक जारी रहेगा जब तक भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव प्रशासन वापस नहीं ले लेता है। पार्टी के राज्य परिषद सदस्य डा0 उमेश चन्द्र वर्मा ने कहा कि ट पूंजीवादी व्यवस्था में सरकारें उद्योगपतियों के एजेंट के रूप में कार्य कर रही हैं। जुलूस का नेतृत्व किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, अमर सिंह प्रधान, जियालाल वर्मा कर रहे थे। जुलूस में पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, राम नरेश वर्मा, राजेश सिंह, विपतराम, दल सिंगार, गिरीश, नीरज वर्मा, राजेन्द्र एडवोकेट, रमाशंकर शर्मा, उमाकान्त, विष्णु त्रिपाठी, मो0 शाहिद, वीरेन्द्र वर्मा, श्रवण कुमार आदि प्रमुख लोग थे।
    जुलूस में किसान लखनऊ विकास प्राधिकरण मुर्दाबाद, जिला प्रशासन मुर्दाबाद, ये दीवानें कहां चले, जेल चले भाई जेल चले आदि नारें लग रहे थे।



नीरज वर्मा
मंत्री
अखिल भारतीय किसान सभा
बाराबंकी 

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

चाहे जो कुर्बानी देनी पड़े।




 
बाराबंकी। जल, जंगल, जमीन बचाने की लड़ाई किसान सभा के नेतृत्व में लड़ी जा रही है जिसके तहत जनपद के विभिन्न गांव में क्रमिक भूख हड़ताल दूसरी दिन भी जारी रही।
यह जानकारी देते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सह सचिव रणधीर सिंह सुमन ने बताया कि ग्राम चन्दनपुरवा, मुबारकपुर, भगौतीपुरवा व कोना गांव में कल से क्रमिक भूख हड़ताल जारी है।
आज निम्न गांवों में क्रमिक भूख हड़ताल प्रारम्भ किया गया है। जिसमें बिशुनपुर में विष्णू त्रिपाठी, उमाकान्त प्रजापति, रमेश, रामू, मसौली में रशीद, मो0 शरीफ, सुग्रीव प्रसाद, मेराज अहमद, दयाशंकर, चन्दनपुरवा में सन्तराम, मुरली, सुखमी, रामप्रकाश, शिवप्रसाद, जगदीश, जियनपुर गांव में धनवासी, सोनावती, तारावती, रामसागर, राममनोरथ मोहम्मदपुर गांव में रामलखन, सुरेन्द्र पाल, देशराज, मलके, रामगोपाल अलीपुर गांव में राममनोहर, अर्जुन सिंह मुनेश्वर, कपिल वर्मा, पंचमलाल मलूकपुर गांव में अवधेश कुमार, विश्राम, रामनरेश, बुधराम, सुन्दरलाल व मुबारकपुर, कोनागांव, भगौतीपुर, अजगना आदि गांवों में सैकड़ों किसान क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे हैं।
उन्होनें आगे बताया कि जनपद के किसान अपना जमीन को किसी भी कीमत पर लखनऊ विकास प्राधिकरण या बाराबंकी विकास प्राधिकरण को अधिग्रहण नहीं करने देंगे। चाहे इसके लिए जो कुर्बानी देनी पड़े।


 नीरज वर्मा
    मंत्री
अखिल भारतीय किसान सभा
जनपद-बाराबंकी

शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

किसानी को बलिदान करने की एक शासकीय साजिश

बाराबंकी। वर्तमान में  भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम वास्तव मे किसानों और गावों मे रहने वाले खेतिहर उद्योगो, कुटीर उद्योगो पर आधारित ग्रामीणो को उनके पीढियो से प्राप्त खेती किसानी को बलिदान करने की एक शासकीय साजिश है।
  अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा आयोजित किसानो की उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ आन्दोलन की रणनीति बनाने की बैठक को सम्बोधित करते हुए ह्यूमन राइट लाॅ नेटवर्क के अधिवक्ता विष्णु शुक्ला ने कहा कि सत्ताधारी दल, भूमाफियाओ को सुविधापूर्वक भूमि हस्तांतरण सुनिश्चित कर सके और किसान और उनके आश्रित उसका विरोध भी न कर सके इसके उद्देश्य की पूर्ति हेतु कानून पास किया गया है। मौजूदा कानून में पुराने कानून को ही घुमा फिराकर लाया गया है तथा पुराने कानून की 61 धाराये ज्यांे की त्यांे इसमे दोहरायी गयी है तथा इसमें प्राइवेट संस्थाओ को उनके लाभार्जन के लिए भूअर्जन की व्यवस्था है तथा किसानो व खेती पर आश्रितो के लिए स्थायी रोजगार उपलब्ध करवाने की कोई न तो ठोस योजना है और न ही अर्जित जमीन पर क्रियान्वित योजना मे उनकी कोई भागीदारी ही है।
    लखनऊ से आए हुए किसान नेता ज़ैद अहमद फारूखी ने कहा कि हरित क्रान्ति, श्वंेतक्रान्ति, पीली क्रान्ति, के बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था क्यों नही सुधर रही है इसका सीधा सा जवाब है कि हमारी सरकारो का किसानो और कृषि आधारित उद्योगो के साथ सौतेलापन व्यवहार है क्योंकि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और उसकी साम्राज्यवादी सहयोगी ताकतो ने देश व दुनिया मे आतंक मचा रखा है, उसके नतीजे मे देश के पेट्रोलियम पदार्थ महंगे हो रहे हैै, मशीनरी महंगी  हो रही है और आधुनिक कृषि मंहगी होती जा रही है जिससे कृषि आधारित उद्योगो का नुकसान हो रहा है।
    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लखनऊ के नेता खालिद ने कहा कि बाराबंकी के किसानो के समर्थन मेे राजधानी मे भी आन्दोेलन चलाया जाएगा। बाराबंकी पार्टी के सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि सरकार अगर नही चेतती है तो 21 अक्टूबर को जेल भरो आन्दोलन प्रारम्भ किया जाएगा। वही पार्टी के सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि जनपद के विभिन्न ग्राम पंचायतो में 16 अक्टूबर से कृमिक भूख हडताल जारी की जाएगी और 20 अक्टूबर तक जारी रहेगी।
        बैठक को मो0 आमिर ,रशीद खाॅ, शिव बहादुर वर्मा(पूर्व जिला पंचायत सदस्य), डा0 कौसर हुसैन, डा0 उमेश चन्द्र, पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, अमर सिंह प्रधान, नीरज कुमार एडवोकेट, राम नरेश वर्मा, बाबू गिरीशचन्द्र, विपतराम, प्रदीप सिंह, व आनन्द सिंह ने सम्बोधित किया और संचालन किसान सभा के जिला अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया।

नीरज वर्मा
मंत्री
अखिल भारतीय किसान सभा
बाराबंकी।


बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

क्या सरकार निर्दोष मुस्लिम नवजवानों का वाद वापसी करना चाहती है?-3


बाराबंकी। अभियुक्त तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद को 24 दिसम्बर लखनऊ जेल पहंचाया गया जहां मौजूद एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके पुलिस ने 9 दिन की रिमाण्ड हासिल करने के बाद अभियुक्तो पर जुल्म ढाए गए और सारी हदे पार कर दी गयी। उन्हे पुलिस की तरफ से सरकारी गवाह बनाने की भी पेशकश की गयी। इसके बाद दोनो अभियुक्तो को फैजाबाद जेल ले जाया गया जहां 8 जनवरी को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने रिमाण्ड हासिल किया और एक बार फिर अभियुक्तो पर जुल्म ढाने का सिलसिला चल पड़ा। कानून के रखवालो के जुल्म ढाने के बाद इंसाफ के घर मंे इंसाफ पाने में भी काफी दिक्कतो ं का सामना करना पड़ा। एक मौके पर तो अभियुक्तों के वकील को भी मारा पीटा गया। इसके साथ साथ पुलिस इन्हे रिमाण्ड हासिल करने के बाद गोमती नगर के एक मकान मंे ले गयी जहां उनके ऊपर बेइन्तिहा जुल्म ढाए गए सोने तक का मौका नही दिया गया, टांगो को चीरा जाता था, बाल उखाड़े जाते थे, इनके अजू तनासिल (वृषण) को डोरी से बांध कर इसमें वजन लटका दिया जाता था जिससे इन्हे बहुत अधिक तकलीफ होती थी तथा इनके मुँह में जबरन शराब उड़ेली जाती थी पेशाब पीने को दिया जाता था। उनके पैखाने के मुहाने में पेट्रोल डाला जाता था जिससे इन्हें असहनीय दर्द होता था। इन्हे सुअर का गोश्त खिलाया जाता था कड़ाके की ठण्ड में बर्फ की सिल्लियो पर लेटाया जाता था, करन्ट के झटके दिए जाते थे। इसी दौरान हैदराबाद,राजस्थान,गुजरात,मुम्बई, बंगाल, दिल्ली और कई और राज्यो की पुलिस पूछताछ करने इनके पास आती थी।इनसे एस0टी0एफ0 ने रटा रटाया बयान याद करवाया। एक बार राजस्थान और दिल्ली की पुलिस के सामने सही बयान दे दिया यह सोचकर कि ये उ0प्र0 की पुलिस नही है सच बता देंगे तो मुझे यह लोग छोड़ देंगे लेकिन सही बयान देने पर उनके ऊपर और अधिक जुल्म ढाने शुरू हो गए। दोनो अभियुक्तो ने अदालत को दिए गए बयान में कहा है कि 17 जनवरी को एक बैटरी जिस पर कुछ चिकनाहट लगा हुआ था इनके हाथ में पकड़वायी गयी इनके हाथ और पैरो के निशान लिए गए और सादे कागज पर इनके हाथ व पैर के निशान लिए गए। पुलिस अधिकारी निशान लेते समय आपस में बात कर रहे थे कि ऐसे सबूत तैयार करो कि इन्हे फांसी के फन्दे तक ले जाने के लिए काफी हों।दोनो ही अभियुक्तो ने बताया कि पुलिस इन्हे सरकारी गवाह बनाने के लिए कह रही थी किन्तु इन्होने सरकारी गवाह बनने से मना कर दिया। इनकी कानूनी पैरवी के लिए अधिवक्ता पहले आगे नही आए और फिर जब लखनऊ के मुहम्मद शुएब एडवोकेट ने हिम्म्त दिखायी तो इन्हे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाराबंकी सिविल कोर्ट में जब वह पहली बार आए तो उस समय जिला बार के महामंत्री प्रदीप सिंह ने भी शुएब एडवोकेट को यह सलाह दी कि वह आतंकवाद के आरोप में निरूद्ध अभियुक्तो की पैरवी न करे वरना उनकी सुरक्षा नही कर पाएंगे। माहौल खराब देखकर शुएब एडवोकेट वापस लखनऊ अपने घर चले गए, लेकिन वहां से उन्होने इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश शिकायत पत्र भेजकर कहा कि अधिवक्ताओं द्वारा उन्हें धमकी दी गयी है। उस समय जिला जज पीयूष कुमार से रिपोर्ट तलब कर ली जिन्होने सरदार बेन्त सिंह और प्रदीप सिंह समेत कई अधिवक्ताओं को नोटिस भेजकर इनका बयान दर्ज कराया गया। अपने खिलाफ हाईकोर्ट का सख्त कार्यवायी देखकर अधिवक्ताओं के तेवर ढीले पड़ गए। इसी समय धर्मनिरपेक्ष मानसिकता के तेजतर्रार अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन ने खुद अभियुक्तो की पैरवी करने की पहल की जिसे इन्होने कबूल कर लिया जिसके नतीजे में अभियुक्तो की कानूनी पैरवी की शुरूआत हो सकी। इस तरह अभियुक्तो तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद को न्याय के मंदिर में भी अन्याय का दर्द सहना पड़ा। जबकि कानून यह कहता है कि जब तक अदालत के सामने इसका अपराध साबित न हो जाए तब तक वह निर्दोष है। लेकिन अभियुक्तो की बदकिस्मती देखिए कि कानून की रखवाली करने वाले न्याय के मंदिर में भी इन अधिवक्ताओें के दंगा फसाद का  रवैया का सामना करना पड़ा जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कत्ल के आरोपी नाथूराम गोडसे के घिनौने अपराध की पैरवी करने पहली कतार में खड़े थे। 
खालिद 

तारिक 

  -मुहम्मद तारिक खान
     अनुवादक -नीरज वर्मा एडवोकेट
        (इंकलाब से साभार)

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

क्या सरकार निर्दोष मुस्लिम नवजवानों का वाद वापसी करना चाहती है?-2

बाराबंकी। एस0टी0एफ0 ने तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद की बाराबंकी रेलवे स्टेशन से हुई गिरफ्तारी की जो कहानी बतायी उसमें छेद ही छेद है। बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर लोगों ने एक ही व्यक्ति को इनोवा कार में रिक्शे से उतार कर जबरन डालते हुए देखा था,जबकि तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद दोनो ही की कद व काठी औसतन साढे़ पांच फिट के करीब है। 22दिसम्बर 2007 को कड़ाके की ठण्ड में सुबह रेलवे स्टेशन पर कम भीड़ थी। सुबह की नमाज़ से फुरसत पाने के बाद लोग अपने घर चले गए और बाकी रात भर खुलने वाली चाय की दुकान पर चाय की चुस्की ले रहे थे।रेलवे स्टेशन के मेनगेट के सामने तिकोने पार्क के किनारे दो चार रिक्शे वाले  नगर पालिका के तहत गिरायी लकड़ी के अलाव के चारो ओर बैठे हाथ सेक रहे थे तथा सायकिल स्टैण्ड के किनारे एक कोने पर फुल्लन शुक्ला नाम का एक व्यक्ति समाचार पत्र के स्टाल पर बैठा समाचार पत्र बेच रहा था। अचानक रेलवे स्टेशन चैराहे से शहर को जाने वाली रोड पर विश्वनाथ के होटल से चन्द कदम पहले बिजली के खम्भे के सामने रिक्शा पर बैठे एक आदमी को इनोवा कार से उतरे एक आदमी को चार पांच लोगो ने काला कपड़ा ओढ़ाकर गोद में उठाकर कार में डाल दिया। लोग कुछ समझ पाते कि कार मंे डालने वाले स्टेनगन सम्भाल कर बोले कि होशियार कोई भी कार के पास नही आए खतरनाक  आतंकवादी पकड़े गए है। इनके पास आर0डी0एक्स0 जैसी खतरनाक विस्फोटक सामग्री है। इनना सुनना था कि रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मच गयी, लोग अपने अपने घर की ओर चल पड़े चाय के होटल पर सन्नाटा छा गया।
    आतंकवादी के पकड़े जाने की खबर जंगल की आग की तरह पूरे शहर में फैल गयी। मीडिया के लोगो का जमघट कोतवाली में जमा होने लगा।जहां  एस0टी0एफ0 और ए0टी0एस0 के साथ लखनऊ की पुलिस कप्तान प्रवीन कुमार स्वयं कोतवाली में मौजूद थे। मीडिया के लोग आतंकवादियों की एक झलक पाने के लिए बेचैन थे लेकिन किसी को अपने मकसद में कामयाबी नही मिली और चन्द समय बाद एस0टी0एफ0 के लोग  कोतवाली में मुकदमा दर्ज करके गाडि़यों से ये कहते हुए लखनऊ की ओर रवाना हो गए कि डी0जी0पी0 केस के सिलसिले में प्रेस के रुबरु होना है। अभियुक्तो को वहां बुलाया गया है जब कि अभियुक्तो को लेकर पुलिस वाले सफेदाबाद गेस्ट हाउस जा पहंुचा, यहाँ अभियुक्तो को बाराबंकी एस0ओ0जी0 के हवाले कर दिया गया,जो इन्हे लेकर जेल पहंुची और वहाँ सी0जे0एम0 ने अभियुक्तों की ज्यूडीशियल रिमाण्ड मन्जूर की।मीडिया के लोग जब रेलवे स्टेशन पहुंचे तो इन्हे सही कहानी इस तरह पता चली कि सबसे पहले चाय की होटल पर उपस्थित अजय कुमार ने मीडिया के लोगो को बताया कि वह सुबह दुकानदारी का समय होने के कारण चारो तरफ ग्राहक खड़ेे थे अचानक शोर मचा तो देखा कि चैराहे के करीब एक रिक्शे पर सवार एक आदमी के करीब खड़े एक बड़ी कार से उतरे लोग इस पर काला रंग का कपड़ा ढककर उसे कार में डाल रहे है। इसके बाद कार तेजी से पुुलिस लाइन की ओर चली गयी। अखबार बेचने वाले फुल्लन शुक्ला ने भी यही बात बतायी। सबसे अहम बात सायकिल स्टैण्ड वाले ने बताया जिसने अपना नाम नही बताया।इसके अनुसार सुबह एक ट्रेन आयी बाहर स्टेशन से बाहर इस समय एक लम्बी काठी का एक आदमी उतरा जिसके दोनो हाथों में काले रंग के बैग थे एक प्लास्टिक की थैला था और दूसरा रेकसीन या चमड़े का था। वह आदमी थोड़़ी दूर जाने पर पी0सी0ओ0के पास ठहरा इधर उधर देखा देखने के बाद रिक्शे वालो के पास आ गया, उसने रिक्शे वालो से कुछ कहा जिससे रिक्शे वालो ने चलने के लिए नही माने। इसके बाद वह आदमी चैराहे की ओर गया तभी एक रिक्शे ले जाने के लिए राजी हो गया। जैसे ही वह चला कि पार्सल कार्यालय के करीब पहले से ही मौजूद एक कार तेज गति से रिक्शे के पास पहुंची और चार पांच आदमी उसमंे से उतरे रिक्शे पर सवार आदमी के सिर और चेहरे को ढककर उसे कार में डाल दिया। जब मीडिया को पुलिस से यह सूचना मिली थी कि आतंकवादी स्टेशन पर पकड़े गए है तो इस बात पर आश्चर्य हुआ कि पुलिस की कहानी कुछ बता रही है और स्टेशन पर देखने वाले लोग कुछ बता रहे है।मीडिया ने पुलिस की बतायी कहानी पर भरोसा किया वही छापा दिखाया जो पुलिस चाह रही थी। एक उर्दू समाचार पत्र को छोड़कर किसी ने भी एक आदमी को पकड़ने की बात नही लिखी।प्रायः देखने में आता है कि पुलिस किसी गुडवर्क का खुलासा करते समय कहती है कि पकड़ने का स्थान और समय वह अभी नही बता सकती। लिखा पढ़ी के बाद ही वह बता पाएंगे लेकिन आश्चर्य कि ऐसे मामलों में जब पुलिस एस0टी0एफ0या ए0टी0एस0 किसी मुस्लिम को आतंकवादी के रुप में पकड़ती है तो मीडिया पुलिस की बनायी गयी कहानी पर विश्वास कर लेती है। हालांकि यह एक संवेदनशील मामला है क्योंकि एक ओर अगर देश की सुरक्षा व उसकी सुख शांति का मामला है तो दूसरी ओर एक पूरी कौम की कौमपरस्ती और देश के लिए वफादारी का भी सम्बन्ध है।
  क्रमशः
    -मुहम्मद तारिक खान
     अनुवादक -नीरज वर्मा एडवोकेट
        (इंकलाब से साभार)

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

क्या सरकार निर्दोष मुस्लिम नवजवानों का वाद वापसी करना चाहती है?

बाराबंकीं। कचहरी सिलसिलेवार बम धमाके केस की वापसी के मामले  में अखिलेश सरकार की नीयत साफ नही है, अगर इसका इरादा नेक होता तो केस को वापस लेने की सरकारी कार्यवायी से पहले इसने मायावती सरकार के समय में गवर्नर की ओर से गठित आर डी निमेश कमीशन की रिपोर्ट को पहले ही प्रकाशित कर देते ताकि जनता के सामने निर्दोष व्यक्तियों की कहानी आ जाती और इसके बाद जब मुकदमा वापसी की कार्यवायी सरकार करती तो सम्प्रदायिक पार्टियां और इनके जनसंगठनों को जनता को फुसलाने का मौका हाथ न लगता। बम धमाके से सम्बन्धित केस वापसी के सम्बन्ध में प़त्र लिखकर जिला मजिस्टेट को आख्या देने को कहा वह प्रचार माध्यमों में लीक हो गए और जिला मजिस्टेट की रिपोर्ट शासन तक आने से पहले विभिन्न न्यायालयों परिसर में अधिवक्ताओं के आन्दोलन का सिलसिला शुरू हो गया।जो आगे और बढता दिखायी दे रहा है।23 नवम्बर 2007 के दिन एक साथ लखनऊ, बनारस, और फैजाबाद की कचहरियों में ताबड़ तोड़ कई बम धमाके हो गए और इसमें 14 व्यक्ति हलाक और करीब 50 जख़्मी हुए।
              बाराबंकी रेलवे स्टेशन से तारिक कासमी (आजमगढ़) और खालिद मुजाहिद (जौनपुर) को बम विस्फोटको के साथ गिरफतार करके इन्होने आतंकवादी संगठन हरकत अलजेहाद(हूजी) का मुख्य कार्यकर्ता बताते हुए फैजाबाद,गोरखपुर (जो कि 23 नवम्बर 2007 से पहले आतंकवादी घटना का शिकार हुआ था) और लखनऊ कचहरी सिलसिलेवार बम धमाके के अभियुक्त करार दिया था। पुलिस व एस0टी0एफ0 के पास से 9अदद जिलेटिन राड पैक शुदा दर्जन डिटोनेटर, सवा किलो आर0डी0एक्स और कई अदद मोबाइल तथा सिम कार्ड बरामद करने का दावा पेश किया था। लेकिन हैरत अंगेज तौर पर बरामद सामग्री को न तो प्रेस को दिखाई गयी और न ही अदालत के सामने खोली। जिसकी वजह से तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद की गिरफतारी पर सवालात खड़े होने शुरू हो गए। नेशनल लोकतान्त्रिक पार्टी के कौमी सदर अरशद खान गिरफतारी के 10 दिन पहले से ही तारिक कासमी की गायब हो जाने की घटना के खिलाफ अपने पार्टी प्लेटफार्म से विरोध कर रहे थे। जब वह 12 दिसम्बर को जौनपुर के थाने मडि़याहू से खालिद मुजाहिद के भी गायब होने की खबर आ गयी तो इनकी पार्टी ने गम्भीर रूख अख्तियार कर लिया।12 दिसम्बर को इनकी पार्टी के प्रादेशिक मुखिया चैधरी चरन पाल सिंह उस समय की मुख्यमंत्री मायावती व गर्वनर उ0प्र0 को ज्ञापन के जरिए आगाह किया कि अगर 22दिसम्बर तक तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद की बरामदगी पुलिस नही करती है तो वह विधानसभा के सामने खुदखुशी कर लेंगे। इस वार्निंग से खौफज़दा मायावती सरकार के पुलिस अधिकारी ने बाराबंकी ने अचानक एक नाटकीय अन्दाज में तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद की गिरफतारी दिखला दी। जबकि 12दिसम्बर 2007 को रानी की सरायं थाना की चेक पोस्ट के करीब लखनऊ बलिया रोड पर मौजा महमूदपुर से हकीम तारिक कासमी निवासी सम्मूपुर थाना रानी की सराय जिला आजमगढ़ के एक सफेद रंग की टाटा सूमो गाड़ी से उतरे कुछ लोगो के जरिये दिन के लगभग 12 बजे  के समय जबरदस्ती अपहरण कर लिया गया। इस घटना को 13 दिनांक को समाचार पत्रों में छापा भी गया था।इसके दो दिन बाद तारिक कासमी के 80 वर्ष के दादा अजहर अली की तहरीर पर थाना रानी की सराय में पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखी थी।तारिक के अपहरण किए जाने की घटना को कई लोगो ने देखा था। इनमें से कई लोगो ने निमेष कमीशन के सामने गवाही भी दी थी। इसी तरह 12 दिसम्बर 2008 के दिन शाम 6 बजे के लगभग कस्बा व थाना मडि़याहू जिला जौनपुर में खालिद मुजाहिद जो एक मदरसे में अध्यापक था, को टाटा सूमो पर सवार कुछ लोगो ने इस समय जबरदस्ती अपहरण कर जौनपुर शहर की तरफ ले गए जब शाम की नमाज अदा करने के बाद खालिद पवन टाकीज के सामने मन्नू चाट वाले की दुकान पर चाट खाने रूके थे। खालिद के अपहरण की तस्दीक निमेष कमीशन के सामने प्रमुख रूप से मुहम्मद शाहिद आलम, मुहम्मद शकील, जुल्फिकार, फखरे आलम, शकील अहमद, हाजी अकरम उल्ला, इम्तियाज अहमद(सभी दुकानदार है), शाहिद जमाल(चाचा जाद भाई खालिद मुजाहिद),अनीस उर्ररहमान एडवोकेट ने की है।खालिद के अपहरण की रिपोर्ट चाचाजाद भाई मुहम्मद शाहिद ने भीड़ के साथ थाने पहुुचकर पुलिस को इसके अपहरण किए जाने की तहरीर दे कर रिपोर्ट लिखानी चाही किन्तु इसकी रिपोर्ट पुलिस ने नही लिखी, इसके बाद खालिद के चाचा फलाही ने मानव अधिकार आयोग,मुख्यमंत्री उ0प्र0, राज्यपाल उ0प्र0 और डी0जी0पी0 आदि को शिकायती पत्र भेजे और खालिद की बरामदगी की प्रार्थना की, लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नही की। चुनाव के समय मुलायम सिंह ने मुसलमानों से वादा किया था कि इनकी सरकार अगर बहुमत में आती है तो आतंकवादी के फर्जी केस से मुस्लिम नवजवानो की जेल से रिहाई कर दी जाएगी। लेकिन बहुमत में आने के बाद जब अखिलेश सरकार ने जस्टिस निमेष कमीशन की प्राथमिकता नही दी जो मार्च मंे ही करनी थी और न ही निमेष कमीशन की रिपोर्ट जनता में प्रकाशित की? इसके बजाए सरकार की ओर से जिला फैजाबाद, गोरखपुर,लखनऊ व बाराबंकी जिला प्रशासन से वाद की जानकारी तलब की जिसके बाद हिन्दुत्ववादी संगठन आर0एस0एस0 व बी0जे0पी0 ने विरोध कार्यक्रम को तेज कर दिया, जो अखिलेश सरकार के बढ़ते हुए कदमो को रोकने का काम जरूर कर सकता है?
   क्रमशः
    -मुहम्मद तारिक खान
     अनुवादक -नीरज वर्मा एडवोकेट
        (इंकलाब से साभार)
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