गुरुवार, 27 अगस्त 2015

आरक्षण समाप्त करने का नया जादू

गुजरात में नागपुर की प्रयोगशाला है, उस प्रयोगशाला में पहले व्यापक पैमाने पर लूटपाट व नरसंहार किया गया था. अब उसी प्रयोगशाला में दो-तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद पिछड़ों व दलितों के आरक्षण को समाप्त करने के लिए नया प्रयोग शुरू हुआ है. गुजरात की रैली में जानबूझ कर पुलिस लाठीचार्ज व उसके बाद भड़काई गयी हिंसा ने अरबों रुपये की परिसंपत्तियों को नष्ट कर दिया तथा हिंसा करने का जो प्रयोग संघी प्रयोग शाला मुसलमानों के खिलाफ करती आ रही थी, वह अपनी ताकत को पुन: दिखाने के लिए अमादा थी और दिखाया और जिस तरीके से गुजरात पुलिस ने लोगों के घरों में घुसकर महिलाओं, बच्चों, पुरुषों को पीटा तथा संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है यही काम पूर्व में मुसलमानों के खिलाफ गुजरात पुलिस ने किया था. गुजरात पुलिस का चरित्र संघ की प्रयोगशाला से निर्मित विचारों से ओत-प्रोत होने के कारण उसने जनता को जगह-जगह मारा पीटा व गोलियां चलाई. इस सब हिंसा और प्रतिहिंसा के बीच संघ आरक्षण को समाप्त करने का कार्य करना चाहती है. अगर पाटीदार जाति ओबीसी में शामिल हो जाती है तो गुजरात में पिछड़े वर्ग के आरक्षण का कोई अर्थ नहीं रह जायेगा. अगर नहीं हो पाती है तो जैसा हार्दिक पटेल ने कहा है कि पटेल-पाटीदार को आरक्षण नहीं तो किसी को आरक्षण नहीं होना चाहिए.
संघी हिन्दुवत्व से प्रभावित सवर्ण जाति के कुछ तत्व बराबर आरक्षण की मांग कर रहे हैं या आरक्षण समाप्त करने की. इस पूरे आन्दोलन को आरएसएस का वैचारिक समर्थन प्राप्त था, बगैर उसकी मदद के इतना बड़ा आन्दोलन खड़ा करना हार्दिक पटेल के बस की बात नहीं थी.
                     संघ के ऊपर हमेशा एक अवसर को छोड़ कर महाराष्ट्र की चितपावन ब्राह्मण जाति का कब्ज़ा रहा है और आज भी प्रमुख पदाधिकारीगण चितपावन ब्राह्मण जाति के हैं वह किसी भी कीमत पर दलितों व पिछड़ों को आरक्षण नहीं देना चाहते हैं. जब देश के प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू की थी तो पूरे देश के अन्दर आरएसएस ने एक तूफ़ान खड़ा कर दिया था और मंडल पर कमंडल लागू करने का कार्य किया था और जब आज कमंडल का ही शासन है तो वह पूरी तरह से देश को मनुस्मृति के दौर में देश को ले जाना चाहती है और उसमें सवर्ण जातियों का शासन हो और बाकी जातियां सेवक की भूमिका में हों ऐसा सामाजिक ढांचा तैयार करने के लिए नागपुर की प्रयोगशाला किसी भी कीमत पर बनाना चाहती हैं उसी का परिणाम है गुजरात में होने वाली हिंसा और पुलिस द्वारा की जा रही प्रति हिंसा, जिससे आरक्षण समाप्त करने की बात को आगे ले जाया जा सके. संघ की प्रयोगशाला का आरक्षण समाप्त करने का नया जादू कितना चल पाता है यह तो वक्त बताएगा.   

सुमन 

4 टिप्‍पणियां:

Rambilas Garg ने कहा…

bilkul shi kaha aapne.

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, नफरत, मौकापरस्ती, आरक्षण और राजनीति , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (29-08-2015) को "आया राखी का त्यौहार" (चर्चा अंक-2082) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक
रक्षाबन्धन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Malay Rai ने कहा…

Sorry but I differ with you in that I feel: reservation is for beggars. Kya 60 years me reservation se wish fulfill nahi Hui Jo meritorious KO maarne wale system ki wakalat Kar RAHE ho aap log.....