बुधवार, 26 अगस्त 2015

मोदी का नया अवतार

गुजरात, प्रधानमंत्री मोदी की वजह से आजकल चर्चित रहता है. पहले आजादी की लड़ाई में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ सफल संघर्ष चलाने वाले महानायक मोहन दास करमचंद गाँधी के कारण चर्चित रहा है आजादी के बाद नेहरु मंत्रीमंडल के उप-प्रधानमंत्री व गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के कार्यों के कारण चर्चा में रहा है. मोदी जब मुख्यमंत्री थे, मुसलमानों के नरसंहार के समय उनके मूक दर्शक होने के कारण गुजरात चर्चित रहा है. मोदी आरएसएस के प्रचारक रहे हैं और महात्मा गाँधी को किसी भी रूप में न मानने के लिए चर्चित संघ रहा है और गाँधी की हत्या में भी संघ का नाम आया और सरदार पटेल ने संघ के ऊपर प्रतिबन्ध लगा दिया था जो बाद में माफीनामे के बाद उसको सांस्कृतिक गतिविधियाँ करने की छूट मिली थी. आज मोदी गुजरात में चल रहे आन्दोलन को शांति करने के लिए जो अपील की है वह महात्मा गाँधी की फोटो व सरदार पटेल की फोटो के साथ की है. यह उनका नया अवतार माना जाए या राजनीति में सत्ता के शिखर के ऊपर बने रहने के लिए विचारों की तिलांजलि माना जाए. यह नया मुखौटा प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए मजबूरी है या जरूरी है.
ज्ञातव्य है कि गुजरात में रिजर्वेशन की मांग कर रही पटेल-पाटीदार कम्युनिटी का आंदोलन हिंसक हो जाने के बाद राज्य के बड़े शहरों में तनाव है। अहमदाबाद और सूरत में असर सबसे ज्यादा है। हालात काबू करने के लिए गांधीनगर से आर्मी की एक टुकड़ी अहमदाबाद बुलवाई गई। इससे पहले कुछ लोगों ने पटरियां उखाड़कर कोयले से लदी एक मालगाड़ी में आग लगाने की भी कोशिश की। वहीं, मंगलवार रात से अब तक हुई हिंसा की वजह से उत्तरी गुजरात के पालनपुर में दो लोगों की मौत हो गई। इस तरह हिंसा के चलते अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच, केंद्र ने पैरामिलिट्री फोर्सेस की 60 कंपनियां  भेजी हैं।
गुजरात में चल रहे मुसलमानों के नरसंहार के समय न महात्मा गाँधी की बात आई थी और न ही सरदार पटेल ही याद आये थे. आज यह अपील अद्भुत अपील है - महात्मा गांधी और सरदार पटेल की तस्वीरों के साथ गुजरात की जनता को टीवी पर दो मिनट छह सेकेंड के इस संबोधन में मोदी ने कहा, 'मेरी सभी भाइयों और बहनों से विनती है कि उन्हें हिंसा का मार्ग नहीं अपनाना चाहिए। इस समय हमारा एक ही मंत्र होना चाहिए, शांति।'
 'हर समस्या का समाधान बातचीत द्वारा निकाला जा सकता है। लोकतंत्र की मर्यादा का पालन हम सबको करना चाहिए। मैं एक बार फिर गुजरात के सभी भाइयों और बहनों को शांति रखने का आग्रह करता हूं। हिंसा के मार्ग पर चलकर कभी कुछ नही मिलता। हम सब साथ मिलकर बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करें।'
यह अपील जब गुजरात में सांप्रदायिक आधार पर अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती हो रही थी उस समय अगर आई होती तो निश्चित रूप से प्रधानमंत्री मोदी का कद जनता के दिमाग में बढ़ गया होता लेकिन आज जब उनका स्वयं का वोट बैंक हिंसा के ऊपर उतर आया है तब वह शांति का पाठ पढ़ाकर गौतम बुद्ध का सन्देश देने की कोशिश कर रहे हैं और जब अल्पसंख्यकों का नरसंहार चल रहा था तब वह हिटलर की यहूदी विरोधी नीति का अनुसरण कर रहे थे. शायद राजनीति में सब कुछ जायज है. 

सुमन 

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