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शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

दरोगा बनने की चाह में सिपाहियों की मौत

उत्तर प्रदेश पुलिस में पद प्रोन्नति हेतु पुलिस विभाग सिपाहियों का टेस्ट चल रहा है जिसमें 10 किलोमीटर दौड़ आवश्यक हैकल सीतापुर जनपद में 10 किलोमीटर की दौड़ में दौड़ रहे सिपाही में तीन सिपाही बेहोश हो गए तुरंत मेडिकल ऐड देने के बाद भी दो सिपाहियों का जीवन बचाया नहीं जा सकादरोगा भर्ती में आजमगढ़ सहित कई जिलों में कई सिपाहियों की मौत हो चुकी है जब सरकार के समक्ष इस समस्या को उठाया गया तो .डी.जी कानून व्यवस्था बृजलाल ने कहा की 10 किलोमीटर की दौड़ को काम नहीं किया जा सकता है
उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग में परेड, भाग दौड़ की कमी हो गयी है अधिकतर सिपाही निरीक्षक अपनी कार्य क्षमता सी अधिक भाग दौड़ के कारण विभिन्न बिमारियों सी ग्रसित हो गए हैंपुलिस विभाग में 24 घंटे लगातार भी ड्यूटी ली जाती है जिसका कोई कंपनसेशन नहीं दिया जाता है
आज जरूरत इस बात की है कि पुलिस विभाग में रिक्त पदों पर अविलम्ब भर्ती की जाएउन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए अधिकारियों कर्मचारियों की भी नियमित परेड कराई जाएलेकिन साधनों के अभाव में यह सब कार्य संभव नहीं हो पा रहे हैं जवानों को घटिया स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है जो चिंतनीय हैसिपाहियों द्वारा दौड़ में बेहोश होकर गिर जाना और उसके बाद मृत्यु होना विभाग के नैतिक बल की कमी पैदा करेगी और जवानो का मनोबल भी गिरेगा

सुमन
लो क सं घ र्ष !

मंगलवार, 1 मार्च 2011

मुख्यमंत्री आ रही हैं चूतड सड़क की तरफ करो- हर समस्या का समाधान लाठी चार्ज

अधिवक्ताओं की पिटाई
उत्तर प्रदेश में लोकतान्त्रिक अधिकारों का हनन होता रहता है और विभिन्न समूहों द्वारा अपनी समस्याओं को लेकर राजधानी लखनऊ में हो रहे प्रदर्शनों का उत्तर प्रदेश सरकार ने एक मात्र इलाज लाठी चार्ज कर रखा है अधिवक्ताओं पर बर्बर लाठी चार्ज के बाद 28 फरवरी को बीएड, बी.पीएड प्रशिक्षित स्नातकों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया इससे पूर्व शहीद स्मारक पर नवजवानों के ऊपर लाठी चार्ज किया गया नवजवान नदी में कूद गए थे फिर हजरतगंज में मदरसा अध्यापकों के ऊपर पुलिस से बर्बर लाठी चार्ज किया औरतों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया
अधिवक्ताओं पर चार्ज के बाद राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में हड़ताल जारी हैं। न्यायिक प्रक्रिया ठप्प है। कोई भी नेता या अफसर जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री मायावती औचक निरिक्षण में व्यस्त हैं। मुख्यमंत्री के औचक निरिक्षण में मुख्यमंत्री से सम्बद्ध अधिकारीयों द्वारा कर्फ्यू लगा दिया जाता है। लोगों को घरों में कैद कर दिया जाता है। जिस मोहल्ले में औचक निरिक्षण होता है वहां महिला सिपाही घर में बैठा दी जाती हैं। नेशनल हाई वे का ट्राफिक रोक दिया जाता है, गंभीर मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। जिससे मरीज मर जाते हैं। मुख्यमंत्री के निकलने के समय पुलिस अधिकारीयों का यह सख्त आदेश जनता को रहता है कि वह चुतड सड़क साइड में कर के खड़ा हो।

सुमन
लो क सं घ र्ष !
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