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शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

मूर्तियों के विसर्जन के बहाने गुंडागर्दी

दरोगा जी खूब पिटे प्रशासन भी साथ ना आया
दरोगा जी खूब पिटे प्रशासन भी साथ ना आया

उत्तर प्रदेश में आज दुर्गा पूजा के बाद जगह जगह मूर्ति विसर्जन का कार्यक्रम चल रहा है इस धार्मिक उत्सव में अराजक तत्वों के हौसले बुलंद है. जगह जगह सड़क पर चल रहे वाहनों के ड्राईवरओ  से मार पीट की जा रही है . अपशब्दों का प्रयोग किया जा रहा है . जुलूस में चल रहे असामाजिक तत्व मारपीट भी कर रहे हैं . बाराबंकी के जहांगीराबाद थाना इंचार्ज सुजाऊदीन के साथ क्षेत्र पंचायत सदस्य उमाकांत यादव ने मार पीट की जिससे थाना इंचार्ज के पूरे शरीर में गंभीर चोटें आई हैं उनका डाक्टरी मुआयना भी नहीं कराया गया है . पुलिस अधीक्षक ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए तुरंत थाना इंचार्ज को निलंबित कर दिया है जिससे अराजक तत्वों के हौसले और बुलंद हो गए हैं . यह अराजक तत्व हिन्दू धार्मिक उत्सवों पर अपनी गुंडागर्दी को चमकाने के लिए बाहर की जनता से व फ़ोर्स पर हमलावर होते हैं . प्रशासन शांतिपूर्वक कार्यक्रम हो जाए इसके लिए इनके आगे नतमस्तक रहता है . बाराबंकी का प्रशासन भी इसी तरह से पूर्णतया गुंडों और मवालियों के आगे नतमस्तक रहा है . धार्मिक उत्सवों में डी जे तथा शराब पीना कहीं से भी जायज नहीं है .

सुमन
लो क सं घ र्ष !

बुधवार, 8 जनवरी 2014

थाना इनके बाप का है ?

यह चिन्ह छीनते ही हैसियत मालूम हो जाती है
किस्सा यह है कि आज एक अधिवक्ता थाना रामनगर जनपद बाराबंकी में अपने क्लाइंट, जो लॉकअप में निरुद्ध था, मिलने गए। वहाँ पर दीवान से अनुमति मांगी उसने कहा कि पांच मिनट बात कर लो। जिस पर अधिवक्ता महोदय उस व्यक्ति से बात करने लगे तभी थाने में तैनात दरोगा शुद्धि भूषण दूबे आये और अधिवक्ता से बदतमीजीपूर्ण तरीके से बात करने लगे तभी एक दूसरा दरोगा आ गया और उसने कहा कि वकील का तस्करा लिख दो। गनीमत यह थी कि अधिवक्ता महोदय फौजदारी के थे और नियम कानून कायदों की बात होने लगी जिससे एक बड़ी घटना होते-होते बची। शुद्धि भूषण दूबे दरोगा जी थाना आपके बाप का नहीं है और फर्जी तस्करा लिखने वाले दरोगा जी न आप के ही बाप का है। आप तो जनता के नौकर हैं और मालिक से बात करने का शऊर आपको आना चाहिए। लोकतंत्र में कानून से बड़ा कोई नही होता है। आप भी कानून से बड़े नहीं हैं और न हम। और अगर आप अपने को कानून से ऊपर समझते हैं तो नौकरी आपको नही करनी चाहिए बल्कि मवालियों की तरह अपनी गुंडागर्दी की बातें जो आप करते हैं उसी का हिस्सा हो जाइये। आप की जानकारी के लिए लिख रहा हूँ  कि मानवाधिकार आयोग  तथा माननीय सर्वोच्च न्यायलय के दिशा-निर्देशों के अनुसार पुलिस बल को कार्य करना चाहिए नहीं तो अपराधी और आप में क्या अंतर रहेगा ? एक अपराधी को घोड़िया लाद कर मिठाई खिलाते हुए ले जाते हुए आप लोगों को शर्म नही महसूस होती है और समाज के भले लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने का जरा सा भी अवसर मिलता है तो आप चूकते नही हैं।  आप अपने परिवार में किस तरीके से रहते होंगे। इसीलिए कोई भी पीड़ित व्यक्ति थाने जाना पसंद नही करता है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

दरोगा बनने की चाह में सिपाहियों की मौत

उत्तर प्रदेश पुलिस में पद प्रोन्नति हेतु पुलिस विभाग सिपाहियों का टेस्ट चल रहा है जिसमें 10 किलोमीटर दौड़ आवश्यक हैकल सीतापुर जनपद में 10 किलोमीटर की दौड़ में दौड़ रहे सिपाही में तीन सिपाही बेहोश हो गए तुरंत मेडिकल ऐड देने के बाद भी दो सिपाहियों का जीवन बचाया नहीं जा सकादरोगा भर्ती में आजमगढ़ सहित कई जिलों में कई सिपाहियों की मौत हो चुकी है जब सरकार के समक्ष इस समस्या को उठाया गया तो .डी.जी कानून व्यवस्था बृजलाल ने कहा की 10 किलोमीटर की दौड़ को काम नहीं किया जा सकता है
उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग में परेड, भाग दौड़ की कमी हो गयी है अधिकतर सिपाही निरीक्षक अपनी कार्य क्षमता सी अधिक भाग दौड़ के कारण विभिन्न बिमारियों सी ग्रसित हो गए हैंपुलिस विभाग में 24 घंटे लगातार भी ड्यूटी ली जाती है जिसका कोई कंपनसेशन नहीं दिया जाता है
आज जरूरत इस बात की है कि पुलिस विभाग में रिक्त पदों पर अविलम्ब भर्ती की जाएउन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए अधिकारियों कर्मचारियों की भी नियमित परेड कराई जाएलेकिन साधनों के अभाव में यह सब कार्य संभव नहीं हो पा रहे हैं जवानों को घटिया स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है जो चिंतनीय हैसिपाहियों द्वारा दौड़ में बेहोश होकर गिर जाना और उसके बाद मृत्यु होना विभाग के नैतिक बल की कमी पैदा करेगी और जवानो का मनोबल भी गिरेगा

सुमन
लो क सं घ र्ष !
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