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सोमवार, 29 अगस्त 2016

नए नरसंहार की तैयारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक मोहन भागवत ने  कहा कि देश में हिंदुत्व की स्थापना के लिए महाभारत होगा। जिसके लिए आप लोग तैयार रहें।
 धर्म स्थापना के लिए जो करना पड़े संघ करेगा। कार्यकर्ताओं से  प्रतिक्रिया में कोई भी काम करने से मना किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ हिन्दू समाज को संगठित करने के अलावा कुछ नहीं करेगा। लेकिन संघ के स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेंगे।
महाभारत का कृष्ण कौन है ?, पांचाली कौन है ?, कौरव सेना कौन है ?, पांडव सेना कौन है ? यह सब अँधेरे में रख कर इशारों-इशारों में नए नरसंहार की अग्रिम सूचना मोहन भागवत दे रहे हैं. कौन धर्मी है, कौन अधर्मी है, किसका नरसंहार होना है. संघ प्रमुख उसको छिपाए हुए हैं लेकिन हिन्दुवत्व के लिए नरसंहार होगा. गुजरात का नरसंहार या उड़ीसा के कंधमाल का नरसंहार राज्य स्तर पर हुआ है लेकिन देश स्तर पर संघ अरुणांचल से लेकर जम्मू और कश्मीर तक हिंदुवत्व का राज कायम करना चाहता है और उसके लिए महाभारत जैसा युद्ध अपने ही देश के नागरिकों के साथ करने घोषणा कर रहा है.
लेकिन मौन है संविधान, मौन है न्यायपालिका, मौन है कार्यपालिका और मौन है विधायिका, महाभारत में मौन का मतलब ध्रतराष्ट्र है.
हम आशावादी हैं, हमारे संविधान की प्रस्तावना मौन नहीं रह सकती है, न्यायपालिका मौन नहीं रह सकती है, कार्यपालिका भी संविधान की प्रस्तावना से प्रतिबद्ध है. हाँ विधायिका पर उनके प्रचारक का कब्ज़ा जरूर है लेकिन वहां भी धृतराष्ट्र की विजय नही होगी. मिथकों के माध्यम से खतरनाक सन्देश देकर अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों, मेहनतकश आवाम को हिटलरी अंदाज में डराने की जो भागवत की मंशा है, वह अपनी मंशा में कामयाब नहीं होंगे. बगैर गांधारी के भागवत धृतराष्ट्र साबित होंगे. नए महाभारत में फिर धृतराष्ट्र का अंत होगा. 
धर्म क्या है और अधर्म क्या है, इसको परिभाषित करने का काम नए सिरे से संविधान की प्रस्तावना में आया शब्द धर्मनिरपेक्षता करेगी. 
शर्मनाक बात यह है कि इस तरह के नरसंहारी लोगों के इस तरह के बयानों पर संसद मौन है.

सुमन

शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

फैसला कीजिये : मोदी बड़े या अडवाणी


हिन्दुवत्व वादी खेमे के सबसे बड़े राजीनीतिक दल में अडवाणी बड़े या मोदी को लेकर घमासान चल रहा है और हिन्दुवत्व वादी तत्व संशय की स्तिथि में हैं। अडवाणी जी ने पहले अपनी रथ यात्रा निकाल कर जनता दल की सरकार को ध्वस्त कर दिया था और फिर बाद में बाबरी मस्जिद ध्वंस करा कर पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे करवाए थे लेकिन पाकिस्तान यात्रा के दौरान जिन्ना की मजार पर जाकर उनका गुणगान भी किया था वहीँ दूसरी तरफ टनाटन हिन्दुवत्व वादी नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हैं। गोधरा ट्रेन कांड के बाद पूरे गुजरात में भारतीय नागरिकों का कत्ले आम कराया था और अब उनके खिलाफ मुंह खोलने वाले आई.पी.एस अफसर संजीव भट्ट निलंबित होकर जेल की हवा खा रहे हैं। डी.डी बंजारा के समय गुजरात में आतंकवाद के नाम पर सरेआम नौजवानों को गोलियों से एनकाउंटर के नाम पर मार डाला गया था लेकिन हिन्दुवत्व वादी नरेंद्र मोदी जी का ह्रदय जरा सा भी नहीं पिघला। नरेंद्र मोदी साहब ने अभी कुछ दिन पूर्व सद्भावना उपवास किया था और एक चापलूस ने इस्लामी टोपी लगाने के लिये भेट की तो उन्होंने सख्ती से मना कर दिया। अडवाणी जी अगर होते तो टोपी अवश्य लगा लेतेअब फैसला हिन्दुवत्व वादी शक्तियों को करना है कि उनका नेता मोदी है या अडवाणी ?

सुमन
लो क सं घ र्ष !

बुधवार, 17 अगस्त 2011

टोपियाँ बदलने का खेल है अन्ना

ब्रिटिश साम्राज्यवाद के आधीन भारत में जो लोग अंग्रेजों के साथ थे आजादी मिलने के पूर्व ही उन्होंने अपनी टोपी बदल दी थी और चालाक लोग गाँधी की टोपी में गए थेसर शोभा सिंह जैसे लोग भगत सिंह को फांसी कराने का इनाम भी लिया और आजाद भारत में कुछ टुकड़े फेंक कर सबसे बड़े परोपकारी के रूप में आये
भ्रष्टाचार आजादी के बाद एक भयानक महामारी के रूप में उभरा किन्तु लोकतान्त्रिक व्यवस्था में राजा से लेकर कनिमोझी तक जेल में हैंभ्रष्टाचार पूंजीवादी व्यवस्था का गुण है और इसी व्यवस्था में अमेरिका, इंग्लैंड समर्थित गाँधी टोपी के सहारे अन्ना पूँजीवाद को बचाने का सबसे बड़ा आन्दोलन चला रहे हैंगाँधी टोपी लगा लेने से कोई गाँधीवादी नहीं हो जाता और सर्वसाधन समपन्न लोकपाल के जाने से भ्रष्टाचार दूर नहीं होता हैगाँधी की हत्या करने वाले और उसके बाद गाँधी वध को जायज ठहराने वाले विचारधारा का साथ अन्ना का आन्दोलन चल रहा है इसका सीधा अर्थ है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जो जन आक्रोश है उसको गलत दिशा देना है कैंडल मार्च से लेकर तरह-तरह के मार्च हो रहे हैंइस आन्दोलन में ज्यादातर हिन्दुवत्व वाली विचारधारा के लोग हैं जिनको इस देश ने कभी स्वीकार नहीं किया है और भ्रष्टाचार के नाम पर बहुत बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी भी गाँधी टोपी लगा कर आन्दोलन के मैदान में हैं

सुमन
लो क सं घ र्ष !

रविवार, 24 जुलाई 2011

जमींदार - राजा-महाराजा यह सब थे देश के गद्दार

भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद की स्थापना के बाद सी राजा-महाराजा-जमींदार यह सब उनके पिट्ठू थे और इनकी हर कोशिश यह रहती थी की ब्रिटिश साम्राज्यवाद का साम्राज्य बना रहेजो राजा या महाराजा या जमींदार अंग्रेजो की गुलामी करने में चूक कर बैठते थे उनके हाथ से शासन सत्ता चली जाती थीइसके अतिरिक्त ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने भारत से गद्दारी करने वालों को सर, राय बहादुर , खान बहादुर सहित सैकड़ों पदवियां दिया था यह लोग भी अंग्रेजों को हर तरह से खुश रखने के लिये कुछ भी करने के लिये तैयार रहते थेभगत सिंह की फांसी दिलाने में अभियोजन पक्ष के दो प्रमुख गवाह शोभा सिंह तथा मेरठ के पास के सादीलाल थे जिनको ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने सर की उपाधि दी थी और तरह-तरह के कार्य इन लोगों के कहने से किये जिससे उस समय यह लोग लाखों रुपये कमाएंसुप्रसिद्ध पत्रकार खुशवंत सिंह सर शोभा सिंह के पुत्र हैं और सर सादीलाल के वंशजों के पास शराब के कारखानों सहित अथाह सम्पदा हैआजादी की लड़ाई में जमींदार राजे-महाराजे महात्मा गाँधी की जय करने पर भी अपने कारिंदों से पिटवा देते थे और पुलिस बुलाकर जेल भिजवा देते थेउस समय की सजाओं में प्रमुख था हंटरों से चमड़ी उधेड़ देना, घाव के ऊपर नमक छिड़क देना, मुंह पर गुह बांध देना
आजादी के बाद "हम तबो लूटा खावा है हम अबो लूटित खाइत है"। तब हिटलर कैप लगावा है अब गांधी कैप लगाईत है " के नारे के साथ देश की शासन सत्ता पर काबिज हो गएआजादी की लड़ाई लड़ने वाला मजदूर-किसान ठगा का ठगा रह गया उसके हिस्से में सिर्फ भूख और प्यास आई और अमेरिकन साम्राज्यवादियों का प्रभाव बढ़ने पर मजदूरों और किसानो के हिस्से में आत्महत्याएं ही रही हैंहिंदुत्व वादी शक्तियां जो पहले ब्रिटिश साम्राज्यवाद के साथ थीं वह अब अमेरिकन साम्राज्यवाद के साथ हैंयह लोग धर्म, जाति, भाषा, प्रांतीयता के नाम पर उन्माद फैला कर देश की एकता और अखंडता को भी कमजोर करते हैं जिससे साम्राज्यवादी ताकतों को बल मिलता है

सुमन
लो क सं घ र्ष !
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