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बुधवार, 20 मार्च 2013

पता नहीं इस लड़की का क्या होगा?-5

   
 सुप्रीम कोर्ट न्यायालय के वकील सर के नाम पे खत
    शनिवार दिनांक 8.10.2011 को रात में दंतेवाड़ा का पुराना थाना के ही बगल में नया थाना बना है उसी नया थाना भवन में प्रताड़ना किया गया है। रात में मैं सोई थी दो लेडीज पुलिसकर्मी मुझे उठाए है। मैंने पूछा क्यों जगा रहे हो, कहने लगे एस0पी0 अंकित गर्ग साहब आए हैं। मुझे दूसरे रूम में ले गए। उस रूम में एस0पी0 अंकित गर्ग और किरन्दूल थाने का एस0डी0पी0ओ0 भी बैठा हुआ था मुझे उस रूम में बिठाया गया साथ में कुछ समय तक लेडीज पुलिसकर्मी थे कुछ देर बाद उन दोनों लेडीज को रूम से बाहर आने को कहा और कहा कि यहाँ पर जो कुछ भी हो रहा है, इस बात को किसी से नहीं कहोगे यदि ऐसा हुआ तो तुम लोग के साथ क्या कर सकता हूँ। तुम लोग अच्छी तरह जानते हो वो दोनों ने कहा जी सर हम किसी से कुछ नहीं कहेंगे ठीक है जाओ ऐसा कहा है। फिर मानकर आरक्षक और वसंत को बुलाया, कहने लगा मानकर तुम डरना मत मैं हूँ ना ये मदर सौद तुम्हारा क्या बिगाड़ेगी। मादर सौद तुम जानना चाहोगी ये प्लान हमने बनाया था जो कामयाब होते नजर आ रहा है। मानकर को कहने लगे बेटा तुम बहुत ही बहादुरी का काम किया तुमसे मैं बहुत खुष हूँ। मदर सौद मैं कौन हूँ एस0पी0 अंकित गर्ग हूँ। जो पहले बीजापुर में था अब बहुत जल्द एस0पी0 से बड़ा रेंज का अधिकारी बनने वाला हूँ। टेबल बजाकर कहने लगा सब कुछ यह से होता है। हम जो कहेंगे वही होगा शासन प्रषासन सरकार यह है। समझी मादर सौद मानकर को तुम क्या बदनाम करोगे उसे तो अब प्रमोषन मिलेगा। काफी देर तक गन्दी-गन्दी गाली देकर मानसिक रूप से प्रताडि़त किया। कई गालियों को मैंने पहले खत में जिक्र किया है। शायद आपको वो खत प्राप्त हुई होगी पूरी बातें खत पर बयान नहीं कर सकती कुछ कागजों में साइन करने को कहा कुछ बातों को लिखकर देने को कहा जब मैंने मना करने लगी तो कड़क बातों से दबाव डाला फिर भी मैंने इंकार करने लगी। तब करेंट सार्ट पैर कपड़ा में देने लगे कुछ देर के लिए रोक दिया और कहने लगा हम जो कह रहे हैं। वो करो इसी में आपकी भलाई है। तुम बच जाओगी समझी। हिमाँशु , स्वामी अग्निवेश , प्रशांत भूषण, कोलिन, लिंगाराम, कविता श्रीवास्तव, मेधा पाटेकर, अरुंधती राय, नंदनी सुन्दर, मनीष कुंजम, रामा सोडी, एस्सार कंपनी का मालिक ये सब के नाम से लेटर लिखकर दो ये सब नक्सली समर्थक है। मैं और लिंगा दिल्ली तक यहाँ की हर खबर देते थे जो मैं जानती हूँ ये लोग बुलाने पर मैं दिल्ली गई थी एस्सार कंपनी के अध्किारी नक्सली तक रूपये पहुचानें के लिए हमेशा  मनीष कुंजम, रामा सोडी और मुझे देते थे इस तरह से हमलोग नक्सली का मदद करते थे बहुत सारी बातें हैं। इस तरह का खत लिखने को कहा। जो मैं लिखकर नहीं दी ना ही उनके लिखा कागज पर साइन भी नहीं किया। मदर सौद हमारे लिखित कागज में साइन कर बहुत ही दबाव डाले मैंने कहा आप जान ले लो पर मैं जो गुनाह की नहीं और जिन लोगों के बारे में कह रहे हो। हो भी नहीं करूँगा। मैंने कहा इससे अच्छा मार दो कहने लगा ये भी कर लेते पर नहीं कर सकते क्योंकि तुम्हें दिल्ली से अरेस्ट किया गया है। अब तुम मेरी बात नहीं मान रही हो तो सजा देकर ही जेल में भेजेंगे ताकि शर्म से जेल की दीवारों में अपना सर पटककर मर जाओगी शिक्षित महिला हो इतनी शर्म को तो लेकर जी तो नहीं पाओगी। इस तरह की बातें कहा और फिर करंट सार्ट देने को कहा करंट सार्ट दे देकर मेरे कपड़े को उतराया गया नंगा करके खड़ा रखा। एस0पी0 अंकित गर्ग कुर्सी में बैठकर हमे देख रहा था। शरीर को देख देखकर गन्दी-गन्दी गालियाँ देकर बेइज्जत किया कुछ देर बाद बाहर निकला और कुछ समय बाद फिर तीन लड़के को भेजा वो लड़के उल्टी सीधी हरकतें करने लगे और धक्का देने पर गिर गई फिर मेरे शरीर में बेदर्दी के साथ डाला गया सह नहीं पाई बेहोषी की हालात में थी काफी देर बाद होश  आया तो मैंने अपने आप को जिस रूम में सोई थी वहाँ पाई। तब तक सुबह हो चुका था रविवार दिनांक 9.10.2011 उस दिन भर दर्द को अंदर ही अंदर सहती रही किससे कहती वहाँ पर मेरा अपना कोई था ही नहीं। सोमवार दिनांक 10.10.2011 को सुबह लेडीज पुलिस हमें कहने लगी फ्रेश  हो जाओ तुमको कोर्ट ले जाना है। तब मैंने कहा मैडम मुझे चक्कर आ रहा है। मेरी हिम्मत नहीं हो रही है। कुछ देर रुक जाओ कहने लगी तुम्हें जल्दी तैयार होने को बोले हैं नहीं तो हमे गाली पड़ेगा। तब मैंने कहा एक कप चाय पीला दीजिए जिससे मैं हिम्मत कर सकूँ चाय पीया और धीरे-धीरे बाथ रूम तक गई कुछ देर बाद चक्कर आया तो गिर गई। मैं पहले से ही बाथरूम तक जाने लायक नहीं थी फिर भी दबाव डालकर बाथरूम में प्रवेश  होने के लिये भेजा गया। शायद ये लोग अच्छी हालात बनाकर मुझे कोर्ट न्यायालय में ले जाना चाहते थे। पर ऐसा नहीं हुआ बाथरूम में गिरते ही बेहोश  हो गई फिर दंतेवाड़ा थाना से निकालकर दंतेवाडा अस्पताल में ले गए काफी देर बाद मुझे होश आया। होश आने के बाद दर्द और ज्यादा बढ़ा गया ना सो सकी ना बिस्तर से उठ सकी पूरी तरह घायल हालात में थी प्रताड़ना का जिक्र किसी से उस वक्त नहीं किया मुझे धमकी दिया गया था फिर भी कोषिश  करती रही कि मौका देखकर मेरे ऊपर किया गया प्रताड़ना के बारे में बताऊँ पुलिसकर्मी तो हर पल मेरे साथ थे। फिर मुझे दंतेवाडा अस्पताल से करीब दो बजे गाड़ी के बीच सीट में सुला कर कोर्ट में लाया गया बहुत देर तक कोर्ट न्यायालय के बाहर ही रखे। न्यायालय के अंदर नहीं ले गए और एस0डी0पी0ओ0 न्यायालय के अंदर से कागजात लेकर आया और कहने लगा इसमें साइन करो मैंने कहा सर मैं कुछ जज के सामने बयान देना चाहती हूँ। तब कहने लगा ये सब बाद में होगा। ये सब कागजात तुम्हें जेल भेजने के लिए है। साइन करो क्या करती इससे अच्छा तो जेल जाना ही ठीक है। सोचकर साइन कर दिया। जज मेडम बगैर देखे सुने हमे जेल भेज दिया बहुत देर बाद कोर्ट से फिर दंतेवाडा थाना में लाए दो व्यक्ति पहले से ही थाने में मौजूद थे इतनी परेशानी होने के बाद भी वो दोनों व्यक्ति हमे पूछताछ कर रहे थे कविता श्रीवास्तव के बारे में मैंने कहा मेरी हालात ठीक नहीं है। इस वक्त मैं बात करने योग्य नहीं हूँ। मुझे जबरदस्ती ना करे। तब तक रामदेव मेरा भाई परिवार के साथ थाना आया और कहने लगा मेरी दीदी को इधर क्यों लाए हो कोर्ट ने तो जेल ले जाने की परमिशन दिया है। तब तुरंत जगदलपुर के लिए रवाना किए। जगदलपुर सेन्ट्रल जेल में शाम को करीब 7-8 बजे पहुँचे मेरी हालात देखकर जेल वाले ने दाखिला नहीं दिया। फिर दंतेवाडा का ही गार्ड हमें जगदलपुर अस्पताल में भर्ती किया। इलाज होता रहा मंगलवार दिनांक 11.10.2011 को जगदलपुर का डॉक्टर रायपुर के लिए रिफर किया। शाम को जगदलपुर अस्पताल से करीब 10-11 बजे रायपुर के लिए निकले रायपुर में बुधवार दिनांक 12.10.2011 सुबह पहुचे रायपुर अस्पताल में भर्ती किया गया इलाज होता रहा। रायपुर का गार्ड जबरदस्ती डॉक्टर से कहकर हमें उसी दिन शाम को करीब 8-9 बजे सेन्ट्रल जेल रायपुर में ले आए, हमने बहुत कोषिश  किया कि सर हमें तकलीफ है, इलाज होने दो फिर भी जबरन ले आए और कहने लगे लाल गेट को दिखते ही अपने आप ठीक हो जाओगे ऐसे कहे है। चलने योग्य भी नहीं थी बड़ी तकलीफों का सामना करते हुए जेल की गेट को प्रवेश किया।                 
स्व हस्ताक्षरित
प्रार्थी
श्रीमती सोनी सोरी (सोढ़ी)



 -हिमांशु कुमार

मंगलवार, 19 मार्च 2013

पता नहीं इस लड़की का क्या होगा?-4

इस बीच लिंगा की बुआ सोनी सोरी का फोन आया कि सर पंद्रह अगस्त को मेरे सरकारी आश्रम जिसमे मैं पढ़ाती हूँ वहाँ नक्सली आए थे और कह रहे थे कि हम ये तिरंगा झंडा उतार कर यहाँ काला झंडा फहराएँगे। तो सर मैंने उनसे खूब बहस की और उनसे कहा कि इस झंडे के लिए भगत सिंह जैसे लोगो ने अपनी कुर्बानी दी है मैं इसे नहीं उतारने दूँगी। फिर वो मुझसे पूछने लगी सर मैंने ठीक किया ना। मैं उसकी बातें सुन रहा था और सोच रहा था मैं इस अकेली कमजोर सी आदिवासी लड़की को सेल्यूट करूँ जो अकेले राष्ट्रध्वज के सम्मान के लिए लड़ रही है या उन वर्दीधारी सुरक्षा बल के बड़े ओहदेदारों को जो रोज इस तिरंगे को बलात्कार और निर्दोषों का खून बहा कर अपमानित करते हैं?
    कल रात इसी लड़की का फोन आया था कि सर मुझे नक्सली घोषित कर दिया है। आज मुझे मारने पुलिस आई थी। मुझ पर गोलियाँ भी चलाईं। मैं बचने के लिए जंगल में भाग गई हूँ। और मैं सोच रहा था। तिरंगे झंडे की रक्षा के लिए अपनी जान पर खेलने वाली लड़की का ये अंत होगा? काश  इसने पुलिस की ज्यादतियों के खिलाफ कोर्ट में जाने का असंवैधानिक काम ना किया होता। का
कि ये आदिवासी ना होती। काष इसके जिले में खनिज सम्पदा ना होती। काष सत्ता पर धनपषु ना बैठे होते। तो इस लड़की को देभक्ति का पुरस्कार मिलता। लेकिन अब देभक्ति का ढोल पीट कर देष की संपत्तियों को विदेशी  कंपनियों को बेचने वाले सरकारी देद्रोही इस लड़की की हत्या करने पर उतारू हैं। सोनी सोरी ने मुझे ये भी बताया कि सर लिंगा ने एक स्कूल में नक्सलियों के काले झंडे को उतार कर फेंक दिया और नक्सलियों को डाँट कर भगा दिया है। मैंने कहा कि तुम लोग सबसे लड़ाई क्यों ले रहे हो? वहाँ जंगल में तुम्हे कौन बचाएगा? खैर।
    लिंगा का अंतिम फोन लगभग दो सप्ताह पहले आया कि सर मैं दिल्ली आ रहा हूँ और मैंने सोचा है कि गाँव में ही रह कर काम करूँगा। सर आप मेरे लिए कहीं से एक कैमरे और एक पुराने लेप टाप की व्यवस्था कर देंगे क्या? मैंने यह बात अपने दोस्तों से कही तो एक लेपटाप लिंगा के लिए मेरे एक दोस्त ने दे दिया है। ये लेख मैं उसी लेपटाप पर लिख रहा हूँ। ये लेपटाप अपने मालिक का इंतजार ही कर रहा है। देखते हैं इसका इंतजार कब खत्म होगा।
    इसी वर्ष मार्च में सरकार ने दंतेवाडा में तीन गाँव जला दिए। ताड्मेतला, तिम्मापुरम और मोरपल्ली। लिंगा तब दिल्ली में ही था। उसने कहा, सर मैं जाकर इन गाँवों के लोगों से मिल कर आता हूँ। लिंगा गया। वहाँ से फोटो और वीडियो लाया। उनकी कापी मेरे पास भी है। और मैंने अपने कुछ दोस्तों को भी दे दी है। क्योंकि इन गावों को जलाने की इस घटना की जाँच सर्वोच्च न्यायालय ने सी.बी.आई. को सौंपी है ! सरकार को पता है की लिंगा सी.बी.आई. को महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है इसलिए उसे जेल में डालने का षड्यंत्र रचा गया।
    फिर चार दिन पहले लिंगा की बुआ सोनी सोरी का अचानक फोन आया कि सर, कल लिंगा को, पुलिस हमारे दादा जी के घर पालनार से पकड कर ले गई। वो बताने लगी, कि सर पुलिस वाले एक दिन पहले लिंगा के पास आए, और बोले कि हम तुम्हारे ऊपर अवधे गौतम के घर पर हमले का केस खतम करा देंगे। तुम बस ये करना कि लाला नामक एक आदमी बाख्शर में एक बैग में पैसे लेकर आएगा। तुम वो पैसे का बैग लेकर पुलिस को लाकर दे देना। बस उसके बाद तुम्हारे सारे केस खत्म। लिंगा ने ऐसा करने से मना कर दिया, और अपने दादा जी के घर चला गया। कुछ देर बाद एक सेद सुमो में सादी वर्दी में पुलिस वाले आए और लिंगा को गाड़ी में डाल कर ले गए। अगले दिन फिर वही लोग सोनी को पकड़ने आए। सोनी जंगल में चली गई। मैंने कहा गिरफ्तार हो जाओ। नहीं तो तुम्हे यह लोग जान से मार देंगे। तो बोली सर मेरे तीन छोटे छोटे बच्चे हैं। मेरा पति भी जेल में है। लिंगा भी जेल गया। इन सब के लिए कौन लडे़गा? मैं दुनिया को सच्चाई बताना चाहती हूँ। उसके बाद जेल भी जाऊँगी। पता नहीं इस लड़कीका क्या होगा?
-हिमांशु कुमार

सोमवार, 18 मार्च 2013

पता नहीं इस लड़की का क्या होगा?-3

लेकिन फिर कल एक फोन ने मेरे सारे विश्वास को डगमगा दिया। दंतेवाड़ा से फिर उसी आदिवासी लडकी ने मुझे बताया की सर, दंतेवाडा के एस0एस0पी0 कल्लूरी नें दो नई नक्सली वारदातों में फिर से उसका नाम जोड़ दिया है और अदालत में उसके खिलाफ चालान भी पेश  कर दिया है। वो लड़की रो रही थी कि सर मैं तो रोज अपने स्कूल में पढ़ाती हूँ, वहाँ मेरी हाजिरी लगी हुई है, मैं जेल में अपने पति से मिलने भी जाती हूँ और जेल के रजिस्टर में दस्तखत भी करती हूँ। लेकिन फिर भी एस0एस0पी0 कल्लूरी ने मुझे फरार घोषित कर दिया है और मुझे मारने की फिराक में है। फोन के उस तरफ वो लड़की रोती जा रही थी और फोन के इस तरफ मैं गुस्से, बेबसी, और असमंजस की हालत में उसका रोना सुनता जा रहा था।
    लाखों लोग इस देश  की आजादी के लिए लड़े थे मेरे पिता भी लड़े थे। क्या यही दिन देखने के लिए उन सारे लोगों ने कुर्बानी दी थी? क्या भगत सिंह इस तरह के देश के लिए शहीद हुए थे? कम से कम मुझे कोई ये तो बता दे की मुझे क्या करना चाहिए? आदिवासी होता तो बन्दूक उठा सकता था। पर सबने गांधीवादी कह कह कर मुझे इतना इज्जतदार बना दिया है कि अब मैं हर अन्याय पर बस इन्टरनेट पर एक लेख लिखता हूँ और सोच लेता हूँ की काफी देश  सेवा हो गई। अब तो मीडिया वालों ने मेरे फोन भी उठाने बंद कर दिए हैं।
    क्या कोई मेरी बात सुन रहा है? हेल्लो? मीडिया, सरकार, न्याय पालिका? है कोई गरीब जनता, आदिवासियों की बात सुनने वाला? क्या कोई बचा है? कम से कम इस लोकतंत्र को बचाने की आखिरी कोषिष तो कर लो, कोई है जो इस बेबस आदिवासी लड़की को बचा सकता है?
    इस बार जब लिंगा दिल्ली से दंतेवाडा जाने लगा तो मैंने उसे जोर से भींच कर गले से लगा लिया। मैंने कहा लिंगा मेरा दिल कह रहा है कि हम अंतिम बार मिल रहे हैं। वो हँसने लगा। और बोला सर मैं अपने दिल से पुलिस का डर निकालना चाहता हूँ। मैंने कोई गलती नहीं की। सारे अपराध पुलिस ने किए। और मैं ही डरूँ? क्यों। इसलिए कि मैं आदिवासी हूँ। और आदिवासियों को पुलिस से डरना चाहिए?
    लिंगा वही लड़का है जिसे दंतेवाडा के तत्कालीन डी0आई0जी0 कल्लूरी और एस0पी0 अमरेश  मिश्रा ने जबरन एस0पी0ओ0 बनाने के लिए चालीस दिन तक दंतेवाडा थाने के शौचालय में भूखा रखा था और जिसे हम लोगों की मदद से उसकी बुआ सोनी सोरी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से मुक्त कराया था। उसके बाद इन दोनों अधिकारियों ने लिंगा की हत्या की कई असफल कोषिषें की। अंत में हमने उसे दिल्ली भेज दिया। वहाँ उसने पत्रकारिता की पढ़ाई की। उसी दौरान डी0आई0जी0 कल्लूरी और एस0पी0 अमरेश  मिश्रा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी थी कि लिंगा कोडोपी कांग्रेसी नेता अवधेश गौतम के घर पर हुए हमले का मास्टर माइंड है। लेकिन जब दिल्ली में शोर मचा कि ये लड़का दिल्ली में है तो दंतेवाडा में कैसे हमला करेगा? तो परम ज्ञानी श्री विश्वरंजन जी ने कहा कि ये विज्ञप्ति गलती से जारी हो गई थी। खैर गलती तो इंसानों से हो ही जाती है। और अच्छे अच्छे पट कथाकार कई बार फ्लाप कहानी भी लिख देते हैं। तो इस बार ये कहानी पिट गई।
    मैंने उसे समझाने की बहुत कोषिष की और उससे कहा कि देखो दंतेवाडा में आदिवासियों का जो नरसंहार सरकार कर रही है उस को रोकने के लिए हम सब को काम करना है। तुम वहाँ जाओगे तो या तो सरकार कोई भी फर्जी मामला बना कर तुम्हे जेल में डाल देगी या फर्जी एन्काउन्टर दिखा कर तुम्हे नक्सली सिद्ध कर के मार देगी। वो बोला ऐसे कैसे मुझे नक्सली सिद्ध कर देंगे? मैंने कहा जो लोग नारायण देसाई जैसे प्रख्यात गांधीवादी और प्रोफेसर यशपाल जैसे अन्तरिक्ष वैज्ञानिकों को माओवादी समर्थक कह कर छत्तीसगढ़ में उनका जलूस निकलवा सकते हैं। उनके लिए तुम्हे माओवादी सिद्ध करना क्या मुष्किल है? छत्तीसगढ़ सरकार तो गुंडागर्दी पर उतरी हुई है।
    लिंगा मुझसे कहने लगा कि मेरे गाँव के लोग चाहते हैं कि मैं वहाँ का बन्द स्कूल और अस्पताल शुरू करवा दूँ। मैं ये काम करवा लूँ फिर आगे का सोचूँगा। आखिरकार हमारी इस बात पर सहमति बनी कि लिंगा तीन महीने दंतेवाडा के अपने गाँव में रहने के बाद दिल्ली आकर पत्रकारिता शुरू करेगा।
    लिंगा बीच बीच में मुझे फोन करता रहता था। उसने मुझे बताया कि वो बस्तर के कमिष्नर श्रीनिवासलू से और दंतेवाडा के कलेक्टर ओम प्रकाश  चैधरी से मिला है और उनको अपने साथ हुई पुरानी पुलिस ज्यादतियों और गाँव में लोगो की तकलीफों के बारे में बताया है। और ये कि इन दोनों ने उसे सहयोग का आष्वासन दिया है। इसके कुछ दिन बाद उसका फिर फोन आया कि सर मुझे नक्सलियों ने बुला कर डांटा है कि मैं इन सरकारी अधिकारियों से क्यों मिला? और ये भी कि नक्सली मुझसे कह रहे थे कि ज्यादा नेतागीरी मत करो! वो मुझसे पूछने लगा कि सर क्या मैं अपने लोगो के भले के लिए काम नहीं कर सकता?
    एक दिन उसका फोन आया और वो मुझे बताने लगा कि सर मैं आदिवासी विकास विभाग के एक अधिकारी से मिला और मैंने उनसे कहा कि आपने गाँव में कोई बिल्डिंग नहीं बनाई है पर कलेक्टर को बता दिया है कि बिल्डिंग बनाई गई है। मैं कलेक्टर को इसके बारे में बताऊँगा। इस पर वो अधिकारी महोदय गिड़गिड़ाने लगे और बोले कि आप को हम नई बिल्डिंगे बनाने का ठेका दे देंगे पर आप हमारी शिकायत मत करो। लिंगा ने बताया सर मैंने उन्हें बोला कि मैं यहाँ ठेकेदारी करने नहीं आया हूँ। बल्कि मैं चाहता हूँ आप गाँव में ईमानदारी से काम करें।
    इस बीच मई जून में मुझे अमरीका जाना पड़ा। एक दिन उसका फोन आया कि सर हम लोग बहुत मुसीबत में हैंै नक्सलियों ने मेरी बुआ सोनी सोरी के पिता अर्थात मेरे दादा का पूरा घर लूट लिया है और उनके पैर में गोली मार दी है। मैंने कहा ठीक हैैै। मैं तुरंत इस समाचार को सब को भेजता हूँ। तो उसने कहा कि नहीं मैं खुद दिल्ली आ रहा हूँ और मैं खुद इसके बारे में प्रेस को बताऊँगा।
    फिर उसका फोन आया कि सर मैं अपना एक मिट्टी का घर बना रहा हूँ। इस बीच उसने बताया कि वो थानेदार से मिला और अपनी मोटरसाइकिल वापिस माँगी तो थानेदार ने लिंगा से कहा कि अगर फिर से मोटर साइकिल माँगने आया तो तुझे किसी भी केस में फँसा कर अन्दर कर देंगे।
-हिमांशु  कुमार

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

पता नहीं इस लड़की का क्या होगा?-2

इस बीच एस0एस0पी0 अमरेश  मिश्रा और डी0आई0जी0 कल्लूरी से लिंगा की बुआ सोनी और उसके पति अनिल मिले। दोनों से पुलिस अधिकारियों ने साफ-साफ कहा कि लिंगा ने कोर्ट में पुलिस की इज्जत खराब की है, उनके पास उसे मारने की ऊपर से छूट है, और उसे तो वे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।
    लिंगा मेरे दंतेवाडा वाले आश्रम में छिपा हुआ था। उसने पूछा, सर, मुझे क्या करना चाहिए?वह बार-बार कहता था, मैं बन्दूक उठा लूँगा। अगर मरना ही है, तो लड़ते हुए मरूँगा। मैंने कुछ सामाजिक संस्थाओं से बातचीत की और लिंगा को गोपनीय तौर पर दिल्ली भिजवा दिया। मेरे कुछ पत्रकार मित्रों ने सलाह दी कि बस्तर में कोई आदिवासी पत्रकार नहीं है। इसलिए लिंगा को पत्रकार बनने में मदद की जानी चाहिए। लिंगा का प्रवेदिल्ली के एक प्रख्यात पत्रकारिता संस्थान में हो गया।
    उधर छत्तीसगढ़ पुलिस को जब लिंगा के पत्रकार बनने की संभावना का पता चला, तो वह घबरा गई, क्योंकि लिंगा छत्तीसगढ़ पुलिस के अत्याचारों का गवाह था और पत्रकार बनने के बाद वह दंतेवाडा में पुलिस की करतूतों का पोल खोल सकता था। आनन-फानन में विश्वरंजन और कल्लूरी ने एक वक्तव्य मीडिया के लिए जारी किया कि लिंगा कोड़ोपी एक बड़ा नक्सली नेता है और माओवादी पार्टी ने अपने प्रवक्ता आजाद के मरने के बाद लिंगा को उनकी जगह नियुक्त किया है, और लिंगा को नक्सलवाद की ट्रेनिंग के लिए अमरीका भेजा गया था (जबकि लिंगा के पास कोई पासपोर्ट नहीं है) और उसका सम्बन्ध अरुंधती रॉय, मेधा पाटकर, हिमांशु  कुमार  और नंदिनी सुन्दर से है।
    इस प्रेस वक्तव्य के बाद स्वामी अग्निवे ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता की तथा चुनौती दी की लिंगा यहाँ है और एक सीधा सादा आदिवासी युवक है जो पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा है और अगर पुलिस के पास कोई सबूत है तो सामने आए। इसके बाद पुलिस ने माफीनामा जारी किया और छत्तीसगढ़ के डी0जी0पी0 विश्वरंजन ने वक्तव्य दिया कि लिंगा के विषय में पिछला वक्तव्य गलती से जारी हो गया था। परन्तु पुलिस भीतर ही भीतर लिंगा को दबोचने का षड्यंत्र रचने में लगी रही, और उसने लिंगा की बुआ सोनी और उसके पति अनिल के विरुद्ध फर्जी रिपोर्ट लिखकर अनिल को तीन महीने से जेल में डाला हुआ है, और सोनी के विरुद्ध वारंट जारी कर दिया है। सोनी वारंट के बावजूद एस0एस0पी0 कल्लूरी से कई बार मिली। हर बार उसने सोनी से एक ही शर्त रखी-कि लिंगा को दिल्ली से वापस लाकर पुलिस को सौंप दिया जाए, तभी वे उसे और उसके पति को छोड़ देंगे, और लिंगा को गोली से उड़ा देंगे।
    सोनी सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल है। रोज स्कूल जाती है, हाजिरी दर्ज करती है और इसे फरार घोषित कर दिया गया है, ताकि इस आदिवासी महिला को कभी भी गोली मार दी जा सके।
    क्या कोई इस निर्दोष लड़की की जान बचाएगा? कहाँ हैं इस देश  के महान मीडिया के दिग्गज? कहाँ है देषभक्ति की ठेकेदार भाजपा? और कहाँ हैं आदिवासियों के सिपाही राहुल गाँधी? मैं रोज इस आशका से जागता हूँ कि सोनी सोरी के मौत की या उसके जेल में डाल देने की खबर आएगी। वह रोज मुझे फोन कर के उसे बचाने का निवेदन करती है। क्या कोई है जो इस महान लोकतंत्र में, इस महाशक्ति बनने जा रहे भारत में, जो इस असहाय, अकेली आदिवासी लड़की को सत्ता और व्यापार के क्रूर पंजों से बचा सके?
    अपने निर्माण के दस साल बाद छत्तीसगढ़ लोकतंत्र के नाम पर एक धब्बा बना हुआ है। लेकिन क्योंकि वहाँ से खनिज पदार्थ लूटना है, जिसमें मनमोहन सिंह, चिदंबरम, कांग्रेस और भाजपा सबकी हिस्सेदारी है, इसलिए छत्तीसगढ़ में इस आतंकवादी शासन पर सब खामोशहैं. लेकिन ये सब लोग फासीवादी खेल खेल रहे हैं जिसका फायदा नक्सलियों को हो रहा है।
    पिछले दिनों मैंने दंतेवाडा जिले की एक आदिवासी लड़की सोनी सोरी के मुष्किल हालात पर एक लेख लिखा था।
जिसमें उसके भांजे लिंगा कोडोपी को दिल्ली से वापिस बुला कर पुलिस के हाथों में सौंप देने के लिए वहाँ का एस0एस0पी0 कल्लूरी इस लडकी से सौदेबाजी कर रहा है। पहले तो उसने धमकी दी कि अगर इस लड़की सोनी सोरी ने अपने भांजे लिंगा कोडोपी को दिल्ली से लाकर पुलिस को नहीं सौंपा तो पुलिस इस लड़की की जिंदगी बर्बाद कर देगी। इसके बाद कल्लूरी नें अपनी धमकी पर अमल करते हुए इस लड़की के पति को जेल में डाल दिया तथा इनकी जीप को जप्त कर लिया और इस लड़की को भी नक्सलियों के साथ मिल कर थाने पर और एक कांग्रेसी नेता के घर पर हमला करने के दो मामलों में फंसा दिया और इसके खिलाफ वारंट जारी कर दिया। इसके बाद इस लड़की ने मुझसे मदद करने की गुहार की। लेकिन आखिर इस दे में दंतेवाडा के एस0एस0पी0 कल्लूरी से ऊपर तो कोई है नहीं। इसलिए मैं इस लड़की की कोई मदद नहीं नहीं कर पाया। हालाँकि मैं मीडिया, एक्टिविस्टों और नेताओं से इस लड़की की मदद के लिए मिला, मदद के नाम पर सबने हाथ खड़े कर दिए। इसलिए मैं इस लड़की की कोई मदद नहीं कर पाया। अंत में मैंने इस उम्मीद में एक लेख लिखा की शायद इस लड़की की जिंदगी को बर्बाद होने से कोई तो बचाएगा। मुझे उम्मीद थी कि आखिर इस विशाल और महान देश में कोई न कोई तो उसकी मदद करेगा।
    अभी बिनायक सेन को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद टेलीवीजन पर ऐसे बहुत से बहादुर लोग बोलते हुए दिखते हैं जो अदालत, सरकार, और लोकतंत्र की तारीफ में बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। और सफलतापूर्वक ये सिद्ध कर रहे हैं कि हम जैसे लोगों को न्याय व्यवस्था पर कोई सवाल नहीं उठाना चाहिए क्योंकि उससे देश कमजोर होता है। तो देष की मजबूती की रक्षा की खातिर मैंने सब बातों को स्वीकार कर लिया और उनकी बातें सुन कर मुझे भी खुद के विचारों पर शक और इस देश की व्यवस्था पर विष्वास सा होने लगा था।
-हिमांशु  कुमार

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