गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

झूठों का सौदागर ओबामा



अमरीकी
राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा अपने बयानबाजी के बाद हिटलर के प्रचार मंत्री गोविल्स को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा था कि ईराक से अमरीकी सेनायें पूरी तरह से वापस हो जाएँगी जबकि असलियत यह है कि बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास में २० ००० अमरीकी तैनात हैं अगर उनके सादे कपड़ों के नीचे देखा जाये तो वह सभी अमेरिकी सैनिक अधिकारी हैं। अमरीका हमेशा स्वतंत्र मुल्कों को गुलाम बनाने का आदि रहा है और अपनी रणनीति के तहत ईराक को गुलाम बनाया है लेकिन उसके मंसूबे पूरे नहीं होंगे। ईरान ने उसके ड्रोन को अपने कब्जे में ले लिया है और बराबरी के साथ धमका भी रहा है यदि अमेरिका ने हमला किया तो ईराक के प्रधानमंत्री नूरी मलेकी जो ईरान के साथ अपने संबंधो को प्रगाढ़ बना रहे हैं वह ईरान के साथ खड़े हुए नजर आ सकते हैं। यह अमरीका की मुख्य चिंता है इसीलिए अमरीका अपनी फौजों को सादी वर्दी में तैनात कर रहा है।
पाकिस्तान में 28 सैनिकों की हत्या नाटो सेनाओं द्वारा किये जाने के बाद वहां की सरकार ने शम्स हवाई अड्डे को खाली करा लिया है। अफगानिस्तान में लड़ रही नाटो सेनाओं के खाद्य व अन्य जरूरत की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। दूसरी तरफ अमेरिका में वाल स्ट्रीट आन्दोलन के गति पकड़ने के कारण पूर्वी तटों पर स्थित बंदरगाहों पर काम बंद है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी मंदी के चपेट में है इसलिए अमरीका के पास झूठ की सौदागरी के अतिरिक्त कुछ शेष नहीं है। अगर ईरान पर हमला करने की स्तिथि में अमेरिकी होते तो उनका स्वर दूसरा होता।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

1 टिप्पणी:

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

इन्हें नोबेल शान्ति पुरस्कार मिला है!